आगरा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी बायोमेडिकल वेस्ट को खुले में फेंका जा रहा है। गड्ढे में गाड़कर तो कहीं जलाकर भी नष्ट कर रहे हैं। इनकी कारस्तानी पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी लापरवाह बने हुए हैं। नियमित निरीक्षण न होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। बायोमेडिकल वेस्ट खुले में फेंकने से संक्रमण का खतरा रहता है। जिले में 18 सीएचसी और 48 पीएचसी हैं। इनमें कई सीएचसी-पीएचसी पर बायोमेडिकल वेस्ट निस्तारण का बुरा हाल है। डिब्बे टूटे हुए हैं। खुले में ही वेस्ट फेंका जा रहा है। गड्ढों में भी दबाया जा रहा है। इसमें संक्रमित सुई और अन्य नुकीले चिकित्सकीय सामान के चुभने पर किसी के भी संक्रमित होने का खतरा रहता है। सीएमओ डॉ. अरुण श्रीवास्तव का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट की सीएचसी प्रभारियों से रिपोर्ट मांग रहा हूं। इनके निस्तारण के लिए तय रंग के डिब्बों की व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए जाएंगे। एत्मादपुर सीएचसी परिसर में ही खुले में बायोमेडिकल वेस्ट फेंक जा रहा है। वेस्ट के लिए डिब्बे भी टूटे हुए हैं। पास में ही महिला वार्ड है, जिससे गर्भवती महिला और प्रसूताओं और नवजात में संक्रमण का खतरा है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अमित अग्रवाल का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट का रोजाना उठान कराते हैं। खुले में फेंके जाने की जांच कराऊंगा। रुनकता पीएचसी पर बायोमेडिकल वेस्ट का नियमानुसार निस्तारण नहीं हो रहा है। इसे गड्ढे में दबाया जा रहा है। परिसर में गंदगी भी है, इसमें आवारा पशु घूमते रहते हैं। यहां मौजूद स्टाफ नर्स ने बताया कि मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए कोई वाहन नहीं आता है। इसके कारण इसे गड्ढे में ही दबा देते हैं।