आगरा के हरीपर्वत स्थित एमडी जैन कॉलेज के सभागार में शनिवार को आयोजित ऑल इंडिया नेशनल होम्योपैथी अधिवेशन में चिकित्सकों ने भविष्य में वायरस जनित बीमारियों का खतरा बताया। साथ ही कहा कि इनका इलाज मीठी गोलियों (होम्योपैथी) से होगा। दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन कैंसर, किडनी, लिवर, ऑटिज्म, ऑटोइम्यून, त्वचा समेत कई बीमारियों में होम्योपैथी के असर पर केस स्टडी के साथ व्याख्यान दिए गए। इसमें देशभर के 250 चिकित्सक शामिल हुए। होम्योपैथी में हो रहे नए शोध के बारे में भी जानकारी दी गई। आइडियल होम्योपैथिक वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन की ओर से आयोजित अधिवेशन में पश्चिम बंगाल से आए डॉ. ध्रुव ज्योति मित्रा ने बताया कि कोरोना महामारी में देश-दुनिया में लाखों लोगों की मौत हुई। अभी इसका खतरा कम नहीं हुआ है। इससे निपटने के लिए होम्योपैथी में नए शोध हो रहे हैं। कोविड में होम्योपैथी कारगर साबित हुई थी। होम्योपैथिक दवाएं वायरस से लड़ने की शरीर में प्रतिरोधक क्षमता को तेजी से विकसित करती हैं। उन्होंने कहा कि ऑटोइम्यून बीमारियां भी लोगों में तेजी से बढ़ रही हैं। इसमें प्रतिरोधक क्षमता स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है। 8-10 फीसदी में ये दिक्कत मिल रही है, जिसमें महिलाओं की संख्या 70-80 फीसदी है। कार्यक्रम के आयोजक और संस्था के सचिव डॉ. पार्थसारथी शर्मा ने कहा कि होम्योपैथी को आयुष्मान योजना से जोड़ा जाए। इससे इसे बढ़ावा मिलेगा। होम्योपैथी के क्लीनिक और अस्पतालों की संख्या बढ़ाने की भी जरूरत बताई। मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्यमंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि होम्योपैथी का इलाज सस्ता और कारगर है। सरकार भी इसको बढ़ावा दे रही है। उद्घाटन सत्र में विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल ने कहा कि कोविड के बाद होम्योपैथी के प्रति भरोसा और बढ़ा है। कार्यशाला में डॉ. जेपी श्रीवास्तव, डॉ. अमित कुमार, सुरेश चंद गर्ग, सुनील जैन, राहुल जैन आदि मौजूद रहे।