डिजिटल जनगणना की राह में तकनीक रोड़ा बन रही है। जिले में स्वगणना (सेल्फ इन्यूमरेशन) की रफ्तार तकनीकी खामियों के कारण सुस्त है। अब तक मात्र 4885 लोग ही स्वगणना की प्रक्रिया पूरी कर सके हैं। इसमें सबसे बड़ी बाधा घर की लोकेशन टैगिंग की अनिवार्यता बन रही है। ऑनलाइन स्वगणना पोर्टल 21 मई तक के लिए खुला है। फॉर्म को अंतिम रूप देने के लिए घर की सटीक लोकेशन को गूगल अर्थ पर ऑनलाइन टैग करना अनिवार्य है। यही ब्योरा प्रगणक के पास पहुंचेगा, जिसके आधार पर भौतिक सत्यापन होगा। पुराने शहर की संकरी गलियों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में गूगल अर्थ सटीक लोकेशन पकड़ने में नाकाम है। कई इलाकों में मैप अपडेट न होने के कारण मकान नंबर तो दूर, पूरी गली ही नहीं दिख रही है। ऐसे में उनके फॉर्म सबमिट नहीं हो रहे हैं। स्वगणना करने वालों के अनुसार मुख्य रूप से तीन बड़ी दिक्कतें आ रही हैं। ऊंचे भवनों या ओवरलैपिंग छतों के कारण जीपीएस कोऑर्डिनेट्स सही ढंग से दर्ज नहीं हो रहे। जिससे लोकेशन मिसमैच हो रही है। एक साथ हजारों लॉग-इन होने पर पोर्टल टाइम आउट हो रहा है, जिससे भरा डाटा उड़ जाता है। जब तक गूगल मैप पर पिन ड्रॉप नहीं होता, तब तक प्रक्रिया पूरी नहीं मानी जाती।