करबला के शहीदों की याद में मनाए जाने वाले मुहर्रम की दसवीं पर शुक्रवार को शहर में अकीदत और गम का माहौल रहा। पाय चौकी स्थित इमामबाड़ा से ऐतिहासिक फूलों का ताज़िया उठने के साथ ही शहर के विभिन्न मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से ताज़िया जुलूस निकलना शुरू हो गए। मुहर्रम के अवसर पर आयोजित मजलिसों और मातमी जुलूसों में हजारों की संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत की। 'या हुसैन' की सदाओं के बीच मातम किया गया। जुलूसों में अलम, मेहंदी और आकर्षक ताज़िए श्रद्धा के साथ निकाले गए। रास्ते भर लोगों ने ताज़ियों का इस्तकबाल किया और जगह-जगह शर्बत व पानी की सबीलें लगाकर अकीदतमंदों की सेवा की। पाय चौकी से निकला ऐतिहासिक फूलों का ताज़िया निर्धारित मार्गों से होता हुआ अबुल उल कर्बला के लिए रवाना हुआ। सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र जुलूस मार्गों पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी तैनात रहे तथा संवेदनशील स्थानों पर विशेष निगरानी रखी गई। परंपरा के अनुसार मुहर्रम की दसवीं पर फूलों के ताज़िए से जुड़े फूलों को करबला में सुपुर्द-ए-खाक (दफन) किया जाएगा।