नकली और अवैध दवाओं के सिंडीकेट की गहरी हो चुकी जड़ों पर अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की भी नजर है। कोतवाली और एमएम गेट में वर्ष 2025 में दर्ज हुए चार मामलों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। कितने आरोपियों को गिरफ्तार किया गया? कितनों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल हुआ? क्या कार्रवाई की गई या नहीं? यह सब जानकारी देनी होगी। पुलिस विभाग ने रिपोर्ट बनाना शुरू कर दिया है। इसे जल्द विभाग को भेज दिया जाएगा। थाना कोतवाली और एमएम गेट में तीन प्राथमिकी नकली और अवैध दवाओं, जबकि एक प्राथमिकी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में लिखी गई थी। इनमें आगरा सहित लखनऊ और पुडुचेरी की दवा फर्मों के संचालकों व विक्रेताओं को भी आरोपी बनाया था। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया कि नकली दवाओं का एक सिंडिकेट काम कर रहा था। करोड़ों रुपये की नकली दवाएं दूसरे राज्यों और जिलों से मंगाई जाती थीं। इनकी सप्लाई अलग-अलग स्थान पर की जाती थी। कैंट स्टेशन से लाॅजिस्टिक कंपनी की मदद से बाजार में खपाई जाती थीं। इनमें जीवन रक्षक दवाएं भी शामिल हैं। ईडी मुख्यालय से पुलिस आयुक्त कार्यालय पत्र भेजा गया था। इसमें नकली दवाओं के तीनों मामलों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसे ईडी को भेजा जाएगा।