आगरा के एमजी रोड स्थित होटल में इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक (आईएपी) की एलरकॉन-2026 कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें बच्चों के तेजी से अस्थमा की चपेट में आने पर चिंता जताई गई। चेन्नई की डॉ. नर्मदा ने बताया कि घर में झाडू लगाने, पर्दे, तकिया, गद्दे, सोफा, चादर, कालीन की धूल (डस्ट माइट), पालतू जानवरों के बाल-रूसी से भी एलर्जी हो रही है। इससे बार-बार छींक, नाक बहना, खुजली समेत अन्य परेशानी हो रही है। नई दिल्ली के डॉ. नीरज गुप्ता ने बताया कि वाहनों-कारखानों का धुआं, निर्माण के चलते धूल और परागकणों से सांस नलिकाएं संकुचित होकर संक्रमित होती हैं। इससे अस्थमा-एलर्जी बन रही है।