आगरा के सदर क्षेत्र की दो सगी बहनों के धर्मांतरण के मामले में जेल भेजे गए 14 आरोपियों के खिलाफ मंगलवार को अपर सत्र न्यायाधीश ज्योत्सना सिंह ने अपहरण, धर्म परिवर्तन और आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने जैसे गंभीर आरोप तय कर दिए। आरोपियों ने आरोपों से इन्कार कर परीक्षण की मांग की है। मामले में अब 7 जुलाई से गवाही की प्रकिया शुरू होगी। 24 मार्च 2025 को सदर क्षेत्र निवासी दो सगी बहनें घर से गायब हो गई थीं। बाद में पुलिस को दोनों को कोलकाता ले जाकर धर्म परिवर्तन करने की जानकारी मिली थी। इस पर कई टीम बनाई गई थीं। एक साथ तीन राज्यों में टीम ने कार्रवाई की थी। डीजीपी राजीव कृष्ण ने मामले का संज्ञान लिया था। पुलिस और एटीएस ने मिलकर अलग-अलग 6 राज्यों से दो युवतियों सहित 14 आरोपियों को हिरासत में लिया था। कोर्ट में पेश कर जेल भेजा था। जांच में पता चला कि धर्मांतरण कराने वाले इस गिरोह के तार अमेरिका, कनाडा सहित कई देशों तक फैले हुए हैं। आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े होने के साक्ष्य भी पुलिस को मिले थे। आरोपी देश के अलग-अलग राज्यों में कम उम्र की लड़कियों को प्रेमजाल में फंसाकर, लव जिहाद एवं अन्य तरीकों से प्रभावित कर धर्मांतरण का काम करते थे। गिरोह के काम करने का तरीका आतंकी संगठन आईएसआईएस के सिग्नेचर स्टाइल में था। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल एक पीड़िता की तस्वीर भी सामने आई थी। वह धर्मांतरण और एके-47 के साथ नजर आ रही है। इससे आईएसआईएस से जुड़े होने के संकेत मिले थे। पुलिस ने विवेचना के बाद 14 आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था। इस पर संज्ञान हुआ। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया था कि आरोपियों ने सगी बहनों का अपहरण किया था। इसके बाद उन्हें विवाह करने या अनुचित संबंध बनाने के लिए विवश करने का प्रयास किया।