आगरा के बरौली अहीर स्थित नवीन फल एवं सब्जी मंडी में लाखों रुपये की व्यापारियों ने दुकानें खरीदीं। करोड़ों रुपये निवेश किए लेकिन, मंडी प्रशासन ने उप मंडी के नाम पर छलावा किया। नतीजा बसई चौराहा के सामने सड़क पर अवैध आढ़तें गुलजार हैं, जबकि बसई में व्यापारी लाचार हैं। बसई में संचालित निजी मंडी के विरोध में बरौली अहीर में दुकानें खरीदने वाले व्यापारी आक्रोशित हैं। सात साल पहले 35 से 60 लाख रुपये तक की बोली लगाकर बरौली में दुकान खरीदने वाले व्यापारी आज एक-एक रुपये के व्यापार को मोहताज हैं। बसई की मंडी को अवैध बताते हुए बंद कराने की मांग की। बरौली अहीर मंडी में व्यापार शुरू कराने की मांग को लेकर व्यापारियों का धरना रविवार को तीसरे दिन भी जारी रहा। प्रशासन को आठ दिन का अल्टीमेटम दिया गया है, मांगें पूरी न होने पर व्यापारियों ने भूख हड़ताल की चेतावनी दी है। व्यापारियों का आरोप है कि बरौली अहीर मंडी का संचालन इसलिए नहीं हो पा रहा है क्योंकि बसई में कलुआ राम उप मंडी स्थल के पास बड़े पैमाने पर अवैध आढ़तें संचालित हो रही हैं। हालात यह हैं कि एक ही परिसर में 125 से अधिक व्यापारी फड़ लगाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं। इन अवैध मंडियों के कारण किसान बरौली अहीर मंडी तक पहुंचते ही नहीं हैं। बरौली अहीर मंडी में 43 आढ़त और 30 सुपर मार्केट की दुकानें बनाई गई थीं। पूरे परिसर में लाइट, पेयजल के लिए पानी की टंकी और चार छोटी टंकियां लगाई गई थीं। फसल नीलामी के लिए बड़ा टिनशेड और चारों ओर सीसी सड़कें बनाई गई थीं, लेकिन मंडी समिति की लापरवाही से सब बर्बाद हो रहा है। परिसर में झाड़ियां उग आई हैं, टंकियां और शौचालय टूट चुके हैं। नीलामी शेड में गंदगी का अंबार है और दुकानें जर्जर हो रही हैं। मंडी समिति कार्यालय के गेट तक टूटे पड़े हैं। बरौली अहीर मंडी परिसर में धरने के तीसरे दिन व्यापारियों को अन्य संगठनों का भी साथ मिला। उनके समर्थन में सिकंदरा फल एवं सब्जी मंडी के आढ़ती, राष्ट्रीय दिव्यांग संघ के सदस्य और कई किसान धरनास्थल पर पहुंचे। उपाध्यक्ष प्रवेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रशासन को दिया गया आठ दिन का समय तेजी से बीत रहा है। यदि जल्द ही बसई की अवैध मंडी बंद कर बरौली अहीर मंडी को सुचारू नहीं किया गया तो व्यापारी आमरण अनशन और भूख हड़ताल के लिए बाध्य होंगे।