कहते हैं दुनिया में अपने लिए तो सब जीते हैं लेकिन जो अपने स्वार्थ को पीछे छोड़ दूसरों के लिए जीता है उसे महान कहते हैं। ऐसी ही एक महान हस्ती है मदर टेरेसा। दया, निस्वार्थ भाव, ममता और प्यार की मूर्ति मदर टेरेसा ने अपनी पूरी जिंदगी दूसरों के लिए न्योछावर कर दी और उनके व्यक्तित्व में चार चांद लगाया नोबेल शांति पुरस्कार ने।