कलम का एक कलंदर, कला के कारोबार में किनारे न लग सका, वजह बनी दोस्ती। दोस्तों के भरोसे शैलेंद्र ने फिल्म बनाई और वहीं फिल्म उनके लिए यातनाओं की अंधेरी गली बन गई। फिर वक्त आया जब शैलेंद्र को शराब की लत लग गई और शब्दों के जादूगर की जिंदगी को शराब पीती चली गई।