फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब एक वेश्या ने विवेकानंद को बदल दिया

वैभव कुमार, अमर उजाला टीवी/ नई दिल्ली Updated Thu, 06 Jul 2017 01:52 PM IST

उठो मेरे शेरों, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो, तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो,सनातन हो, तुम तत्व नहीं हो, ना ही शरीर हो, तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो। ये शब्द थे उस सन्यासी के जिसने पूरी दुनिया में भारत को एक नई पहचान दी। ये शब्द थे स्वामी विवेकानंद के।
 

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें