आज भारतीय नारी, पुरुषवादी समाज और बंदिशों की मर्यादाओं की चार-दीवारी को तोड़ते हुए देश की सवा-सौ करोड़ की आबादी की रक्षक बन गई है। इनके हौसले और हिम्मत के आगे दुश्मन का दम भी टूट जाता है। हम सभी अपने घरों में इसलिए चैन से सो पाते हैं क्योंकि वो बेटियां जाग रही होती हैं। जी हां, ये वो बेटियां है जिनके मां-बाप अपने सीना गर्व से चौड़ा करके कहते हैं कि हां, ये हमारी बेटियां हैं।