शिमला के राम मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्रीराम कथा का रविवार को भक्ति और श्रद्धा के माहौल में समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को सीता हरण का प्रसंग सुनाया गया, जिसे सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग मंदिर परिसर में पहुंचे। कथावाचक आचार्य नंदीश्वर महाराज ने अपने प्रवचन में बताया कि रावण द्वारा माता सीता के हरण का प्रसंग केवल एक घटना नहीं, बल्कि धर्म और अधर्म के बीच संघर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा और कर्तव्य पालन की प्रेरणा देता है। प्रवचन के दौरान आचार्य ने भगवान हनुमान के चरित्र को साहस, निस्वार्थ सेवा, अटूट भक्ति और समर्पण का सर्वोत्तम उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि श्रीराम-रावण युद्ध इस बात का संदेश देता है कि अंततः सत्य और धर्म की ही विजय होती है। कथा के समापन पर श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया और समाज में नैतिक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लिया।