राम बहादुर की अपनी जन्मभूमि नेपाल में प्राण त्यागने की इच्छा अब पूरी होगी। हिमाचल प्रदेश के चंबा में स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी महासंघ के प्रदेशाध्यक्ष गजिंद्र ठाकुर के प्रयासों और अमर उजाला में प्रकाशित खबर के बाद बिछड़े बाप-बेटा आखिकार मिल ही गए। 18 वर्षों बाद बेटे हरिशरण को देख कर राम बहादुर के आंखों में आंसू छलक पड़े। बेटे ने पिता को गले लगा कर ढांढस बंधाया।