गुलजार सिंह खासा ने कांग्रेस छोड़कर अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल होने का ऐलान किया। इस दौरान पार्टी नेताओं ने पंजाब में मौजूदा कानून-व्यवस्था, नशे की समस्या और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर तीखे सवाल उठाए। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि पंजाब में युवाओं के बीच डर और दहशत का माहौल बनाया जा रहा है तथा राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हाल के धमाकों और अन्य घटनाओं को लेकर सरकार और एजेंसियों के अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं, जिससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। नेताओं ने दावा किया कि पंजाब में नशे के कारण परिवार बर्बाद हो रहे हैं और सरकार की “युद्ध नशों के विरुद्ध” मुहिम पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि अमृतपाल सिंह ने सबसे पहले नशे के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया था और पंजाब की जनता 2027 के चुनावों में बदलाव के मूड में है। इस दौरान अमृतपाल सिंह की माता द्वारा मुख्यमंत्री भगवंत मान से मुलाकात की कोशिश का भी जिक्र किया गया। नेताओं का आरोप था कि जब उन्होंने अपने बेटे के मामले में बात करनी चाही तो मुख्यमंत्री ने उनकी बात सुनने की बजाय सुरक्षा कर्मियों को उन्हें पीछे करने के निर्देश दिए। इसे नेताओं ने राजनीतिक दुर्भावना का उदाहरण बताया।