पंजाब विधानसभा के स्पीकर कुलतार सिंह संधवां की ओर से विधानसभा सत्र के दौरान सिखों के केश को लेकर कथित तौर पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी का मामला अब श्री अकाल तख्त साहिब पहुंच गया है। अकाली दल वारिस पंजाब के प्रतिनिधिमंडल ने श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज को मांगपत्र सौंपकर स्पीकर को तलब करने और सख्त धार्मिक कार्रवाई की मांग की। सुरजीत सिंह भूरा और भाई दरवेश सिंह भूरा के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि विधानसभा में एक सदस्य की ओर से श्री अकाल तख्त साहिब के आदेश को लेकर स्पीकर से राय पूछी गई थी। आरोप है कि जवाब देते समय संधवां ने सिखों के केश और स्वरूप को लेकर ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल किया, जिससे सिख समुदाय की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। जत्थेबंदी के नेताओं ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख कौम की सर्वोच्च धार्मिक संस्था है और इसकी मर्यादा के संबंध में आपत्तिजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि केश सिख धर्म में गुरु की मोहर माने जाते हैं और दस्तार सिख स्वरूप का महत्वपूर्ण हिस्सा है। नेताओं ने सिख इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि दसवें पातशाह श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा पंथ को यह स्वरूप प्रदान किया था। उन्होंने पीर बुधू शाह का भी उल्लेख करते हुए कहा कि सिख इतिहास में केश को विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। अकाली दल वारिस पंजाब ने मांग की कि स्पीकर कुलतार सिंह संधवां को श्री अकाल तख्त साहिब में तलब कर उनसे स्पष्टीकरण लिया जाए। यदि टिप्पणी धार्मिक मर्यादा के विपरीत पाई जाती है तो अकाल तख्त की मर्यादा के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।