सचखंड श्री हरिमंदिर साहिब के पूर्व हेड ग्रंथी ज्ञानी रघवीर सिंह ने जून 1984 के सैन्य अभियान के दौरान सिख रेफरेंस लाइब्रेरी से ले जाए गए दुर्लभ दस्तावेजों और पावन स्वरूपों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार द्वारा सारा सामान वापस करने का दावा किया जा रहा है, जबकि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी इस बात से इनकार कर रही है। इस विरोधाभास से सिख संगत में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। ज्ञानी रघवीर सिंह ने आशंका जताई कि कई विद्वानों के अनुसार यह अमूल्य ऐतिहासिक धरोहर विदेशों में बेची भी जा सकती है। उन्होंने मांग की कि इस मामले से जुड़े सभी रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं ताकि सच्चाई सामने आ सके। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में 2015 से हो रही बेअदबी की घटनाओं पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि अब तक संगत को न्याय नहीं मिला है। उन्होंने बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाने का समर्थन किया। इस दौरान उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल पर निशाना साधते हुए कहा कि उनमें सिखी का कोई अंश नहीं बचा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बादल द्वारा श्री अकाल तख्त साहिब के फैसलों को एजेंसियों की साजिश बताना पंथक परंपराओं का अपमान है। ज्ञानी रघवीर सिंह ने कहा कि श्री अकाल तख्त साहिब सिख कौम की सर्वोच्च संस्था है और इसकी गरिमा को किसी भी हालत में कम नहीं किया जा सकता।