यह मामला मेरठ के जिला अस्पताल का है। सरकारी तंत्र को मुंह चिढ़ाती हुई इस व्यवस्था पर यह करारा प्रहार है। जनपद बागपत के गांव निवाडा की रहने वाली महिला अपने बुखार से पीड़ित 3 साल की मासूम को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंची, जहां से उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। लेकिन यहां उसका समुचित इलाज नहीं हुआ जिससे बच्ची की मौत हो गई। विडंबना यह है कि उसकी लाश को वापस निवाड़ा ले जाने के लिए टैक्सी वाले ढाई हजार रुपए मांग रहे थे। लेकिन महिला के पास इतने पैसे मौजूद नहीं थे। अस्पताल प्रशासन ने महिला की कोई मदद नहीं की और महिला पूरी रात अपने 3 साल की मासूम को लेकर जिला अस्पताल में इमरजेंसी के गेट पर बैठी रही।