विधानसभा मुख्यालय पर निकली बीजेपी की तिरंगा यात्रा... देशभक्ति के नारों और तिरंगे के बीच निकलने वाली इस यात्रा के बाद अब बीजेपी की अंदरूनी खींचतान चर्चा में है। आरोप है कि यात्रा का तय मार्ग अचानक बदल दिया गया, जिसके बाद नपं अध्यक्ष अवनीश सिंह के समर्थक नाराज हो गए। मामला इतना बढ़ा कि सरेराह एक बीजेपी नेता की कार को घेर लिया गया और जमकर नारेबाजी हुई। कार के चारों तरफ खड़े समर्थकों ने मुर्दाबाद के नारे लगाए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया है।
दरअसल, बुधवार को बीजेपी की ओर से तिरंगा यात्रा का कार्यक्रम तय किया गया था। इसके लिए जमखुरी निवासी ओम प्रकाश त्रिपाठी को यात्रा का संयोजक बनाया गया था। तय कार्यक्रम के मुताबिक यात्रा स्थानीय सर्वोदय इंटर कॉलेज से शुरू होकर वीर अब्दुल हमीद चौक यानी दुर्गापुर तिराहा तक जानी थी।
यात्रा में व्यवस्था की जिम्मेदारी स्थानीय नगर पंचायत अध्यक्ष अवनीश सिंह को दी गई थी। नपं अध्यक्ष की ओर से यात्रा में शामिल लोगों के लिए भोजन और बैठने की व्यवस्था भी की गई थी। यात्रा के तय मार्ग और कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारी की गई थी।
लेकिन आरोप है कि ऐन वक्त पर यात्रा का रास्ता बदल दिया गया। यात्रा को वीर अब्दुल हमीद चौक की तरफ ले जाने के बजाय मुख्य चौराहे से दियरा रोड और फिर पठखौली रोड होते हुए दोबारा सर्वोदय इंटर कॉलेज पहुंचा दिया गया।
मार्ग बदलने के बाद विवाद खड़ा हो गया। नपं अध्यक्ष अवनीश सिंह के समर्थक इससे नाराज हो गए। उनका आरोप है कि जिस जगह के लिए पूरी व्यवस्था की गई थी, यात्रा वहां पहुंची ही नहीं और पूरी तैयारी धरी की धरी रह गई।
नपं अध्यक्ष अवनीश सिंह ने आरोप लगाया कि उन्होंने यात्रा को लेकर सारी व्यवस्थाएं कर रखी थीं, लेकिन बीजेपी के जिला महामंत्री विजय प्रताप त्रिपाठी ने यात्रा को दूसरे रास्ते से घुमवा दिया।
इस विवाद को बीजेपी की स्थानीय राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल, पिछले नगर पंचायत चुनाव में विजय प्रताप त्रिपाठी बीजेपी प्रत्याशी के तौर पर अध्यक्ष पद के उम्मीदवार थे। चुनाव में उन्हें निर्दलीय प्रत्याशी अवनीश सिंह ने हरा दिया था। बाद में अवनीश सिंह लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में बीजेपी में शामिल हो गए थे।
यही वजह है कि अब यात्रा के रास्ते को लेकर हुए विवाद को स्थानीय राजनीतिक खींचतान से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, बीजेपी जिला महामंत्री विजय प्रताप त्रिपाठी की ओर से इस पूरे विवाद पर विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वहीं, बीजेपी जिलाध्यक्ष सुशील त्रिपाठी ने कहा कि उन्हें पूरे प्रकरण की जानकारी नहीं है।
इस विवाद का एक और अहम पहलू ये रहा कि तिरंगा यात्रा के संयोजक ओम प्रकाश त्रिपाठी भी बीच रास्ते से ही वापस लौट गए। बताया जा रहा है कि यात्रा के मार्ग को लेकर उनकी एसडीएम और सीओ के साथ बैठक भी हो चुकी थी और मार्ग पहले से तय था। लेकिन रास्ता बदले जाने से नाराज होकर वह आधे रास्ते से घर लौट गए।
उधर, समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक संतोष पांडेय ने सोशल मीडिया के जरिए बीजेपी पर निशाना साधा है। उन्होंने बीजेपी और उसके पदाधिकारियों पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाते हुए तंज किया कि कार्यकर्ताओं ने ही पदाधिकारी की "लंका लगा दी"।
पूर्व विधायक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया, जिसमें बीजेपी के जिला महामंत्री विजय प्रताप त्रिपाठी कार्यकर्ताओं से घिरे नजर आ रहे हैं।
यानी जिस तिरंगा यात्रा का मकसद देशभक्ति और एकजुटता का संदेश देना था, वही यात्रा अब बीजेपी की अंदरूनी खींचतान का अखाड़ा बन गई। सवाल ये है कि आखिर तय मार्ग को आखिरी वक्त में क्यों बदला गया? क्या इसके पीछे कोई प्रशासनिक वजह थी या फिर स्थानीय राजनीतिक खींचतान? और क्या इस विवाद के बाद पार्टी संगठन इस मामले में कोई कार्रवाई करेगा? फिलहाल इन सवालों के जवाब का इंतजार है।