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आतंकी डॉ. उमर से जुड़े दो बड़े खुलासे

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Wed, 19 Nov 2025 12:03 PM IST

दिल्ली के लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस मामले से जुड़ी नई परतें खुलती जा रही हैं। जांच एजेंसियों के निशाने पर मुख्य आरोपी आतंकी डॉ. उमर मोहम्मद और उसके नेटवर्क की गतिविधियाँ हैं। मंगलवार को दो बड़े खुलासों ने इस केस को और गंभीर बना दिया है।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने नूंह की हिदायत कॉलोनी में उमर नबी को कमरा उपलब्ध कराने के आरोप में करीब 35 वर्षीय एक महिला को हिरासत में लिया है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं की गई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार सोमवार देर रात महिला को एनआईए ने पकड़ लिया। महिला का निकाह राजस्थान में हुआ है और उसके जरिए उमर को सुरक्षित ठिकाना दिलवाया गया था।

कुछ दिनों से हिदायत कॉलोनी में भारी सुरक्षा थी, लेकिन मंगलवार को पुलिस ने बैरिकेड्स हटा लिए। इसका संकेत है कि शुरुआती तलाशी पूरी हो चुकी है और अब पूछताछ का दायरा बढ़ाया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, 30 अक्टूबर को यूनिवर्सिटी से फरार होने से पहले डॉ. उमर ने अपने कमरे में 1 मिनट 20 सेकंड का एक वीडियो बनाया था। यह वीडियो मंगलवार को वायरल हुआ, जिसमें उसकी अंग्रेजी भाषा पर मजबूत पकड़ साफ दिखती है।

जांच अधिकारियों का दावा है कि वीडियो की बातचीत से समझ आता है कि जैश-ए-मोहम्मद के पाकिस्तानी हैंडलर ने उसका पूरा ‘ब्रेनवॉश’ किया हुआ था।
वीडियो में उसके चेहरे पर न डर है, न घबराहट उसे बताया जा चुका था कि उसे फिदायीन हमला करना है।

इस वीडियो ने जांच एजेंसियों को साफ संकेत दिया है कि विस्फोट कोई अचानक लिया फैसला नहीं था, बल्कि एक लंबी प्लानिंग का हिस्सा था।

दूसरा बड़ा खुलासा: 6 महीने गायब रहा उमर, किसी को खबर नहीं

उमर के साथी डॉक्टरों ने अमर उजाला से बात करते हुए बताया कि साल 2023 में उमर करीब छह महीने तक अस्पताल और यूनिवर्सिटी से गायब रहा।
न तो छुट्टी का आवेदन, न कोई जानकारी कुछ भी नहीं।

और अजीब बात यह कि लौटने पर बिना किसी कार्रवाई के उसने सीधे ड्यूटी जॉइन कर ली। यहां तक कि सीनियर डॉक्टरों और बैचमेट्स को भी पता नहीं था कि वह इन छह महीनों में कहां था और क्या कर रहा था।

जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. उमर को यूनिवर्सिटी प्रबंधन ने अनोखी छूट दे रखी थी।
दो डॉक्टरों ने बताया:
    •    वह सप्ताह में सिर्फ 1-2 लेक्चर, वो भी 15–20 मिनट के लेता था।
    •    उसकी ड्यूटी हमेशा इवनिंग और नाइट शिफ्ट में लगाई जाती थी।
    •    ड्यूटी के समय वह अस्पताल में मौजूद नहीं होता, कॉल करने पर ही आता था।
    •    कुछ मिनट मरीज देखकर तुरंत अपने कमरे लौट जाता था।

प्रशासन का व्यवहार ऐसा था मानो उसे ‘विशेष संरक्षण’ प्राप्त था। यही वजह है कि अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या यूनिवर्सिटी में कोई इनसाइड हैंडलर काम कर रहा था।

एनआईए ने उमर के सहयोगी आमिर राशिद अली को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। वह 10 दिन की न्यायिक हिरासत में है। उसके सरकारी वकील ने खुलासा किया कि पूछताछ के दौरान आमिर के चेहरे पर न कोई शिकन थी, न ही पछतावा। उसने बताया कि धमाके में इस्तेमाल कार उसी के नाम पर रजिस्टर्ड है।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी में पिछले कई दिनों से NIA और ED की जांच जारी है। इसके कारण छात्रों और कर्मचारियों में भय का माहौल है। मंगलवार को कई कर्मचारी अपने सामान के साथ कैंपस छोड़ते दिखे। सूत्रों के अनुसार, वे लंबी छुट्टी लेकर घर लौट रहे हैं। अस्पताल में भी असर दिख रहा है जहां पहले 200 मरीज OPD में आते थे, अब यह संख्या घटकर 100 से भी कम रह गई है।

हालांकि मंगलवार को सुरक्षा में थोड़ी ढील दिखी। दोपहिया वाहन और पैदल यात्रियों को छोटी गेट से आने-जाने दिया गया। लेकिन बड़े वाहनों की चेकिंग जारी रही। सुबह करीब 9 बजे ED की टीम भी यूनिवर्सिटी पहुंची। कैंपस में सन्नाटा तो है, लेकिन लोग धीरे-धीरे सामान्य होते दिख रहे हैं।

यह साफ है कि लाल किला ब्लास्ट की जांच ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी को भी गहरे संदेह के घेरे में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना है।

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