अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अतरिक्त टैरिफ के चलते भारत और अमेरिका के रिश्तों में बीते दिनों से तनाव देखने को मिला है। ऐसे में अब ट्रंप ने भारत पर लगे टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है। पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि फिलहाल भारत पर अमेरिकी टैरिफ बहुत ज्यादा हैं, क्योंकि भारत पहले रूस से तेल ले रहा था।उन्होंने कहा कि अब भारत ने रूस से तेल खरीदना कम कर दिया है और मैंने भी रूस का तेल व्यापार बहुत हद तक बंद करवा दिया है, इसलिए भारत पर लगे टैरिफ को जल्द ही कम कर दिया जाएगाा। इस बात की पुष्टि करते हुए ट्रंप ने साफ-साफ कहा कि हां, हम भारत पर लगे टैरिफ को कम करने जा रहे हैं, जो कि हम किसी भी समय, किसी भी दिन कर देंगे। दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका और भारत के बीच नया व्यापार समझौता तैयार हो रहा है, जो पहले के समझौतों से बहुत अलग और न्यायपूर्ण होगा। उन्होंने कहा कि अभी भारत मुझे पसंद नहीं करता, लेकिन जल्द ही वे हमें फिर से पसंद करेंगे। हमें एक न्यायपूर्ण और सभी के लिए फायदेमंद व्यापार समझौता मिल रहा है।
पहले हमारे सौदे काफी असमान थे, लेकिन अब हम एक संतुलित डील के काफी करीब हैं। इससे पहले भारत में अमेरिका के नए राजदूत और दक्षिण-एशिया विशेष दूत नियुक्त हुए सर्जियो गोर के शपथ ग्रहण समारोह में ट्रंप ने भारत की तारीफ की। ट्रंप ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे पुरानी सभ्यताओं में से एक है, सबसे बड़ा देश है और यहां 1.5 अरब से ज्यादा लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी के साथ संबंध शानदार हैं और सर्जियो गोर ने इसे और मजबूत किया है। इस दौरान ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि गोर का काम अमेरिका और भारत के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मजबूत करना होगा। उन्होंने बताया कि गोर निवेश बढ़ाने, अमेरिकी ऊर्जा निर्यात को बढ़ाने और तकनीकी सहयोग को मजबूत करने में मदद करेंगे।ट्रम्प ने भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ लगाया व रूसी तेल की खरीद पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया। इससे भारत पर लगाया गया कुल शुल्क 50 प्रतिशत हो गया। भारत ने अमेरिकी कार्रवाई को अनुचित बताया था।
सर्जियो गोर के शपथ ग्रहण के बाद ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने एक सवाल का जवाब दिया कि भारत के साथ व्यापार समझौता कितना करीब है और क्या वह नई दिल्ली पर टैरिफ कम करने पर विचार करेंगे. इस पर, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि ठीक है, अभी, रूसी तेल की वजह से भारत पर टैरिफ बहुत अधिक हैं, और उन्होंने रूसी तेल का व्यापार काफी हद तक कम कर दिया गया है. तो हां, हम टैरिफ को कम करने जा रहे हैं.दोनों देशों के नेताओं के निर्देशों के बाद फरवरी में औपचारिक रूप से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते का लक्ष्य 2030 तक व्यापार की मात्रा को मौजूदा 191 बिलियन अमरीकी डॉलर से दोगुना करके 500 बिलियन अमरीकी डॉलर करना है. वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल सितंबर में अमेरिका में थे, जहां उन्होंने उच्च स्तरीय व्यापार वार्ता का नेतृत्व किया क्योंकि दोनों देश एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं. गोयल के साथ मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भी था, जिसमें विशेष सचिव और भारत के मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल भी शामिल थे. सितंबर के मध्य में, दक्षिण और मध्य एशिया के लिए सहायक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में संयुक्त राज्य के अधिकारियों की एक टीम ने नई दिल्ली में भारत के वाणिज्य विभाग के अधिकारियों के साथ सकारात्मक चर्चा की थी.