उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने मतदाता सूचियों के एसआईआर कार्यान्वयन पर कहा, "वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जा रहे हैं और प्रक्रियाओं व शंकाओं को दूर कर दिया गया है.जिन मतदाताओं के हस्ताक्षर सत्यापित हो चुके हैं, उन सभी के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में दिखाई देंगे। जिन मतदाताओं के नाम 2003 की मतदाता सूची में पहले से शामिल हैं, उन्हें कोई अतिरिक्त दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं है।"
मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या सुधारने के दौरान, 2003 की सूची में दर्ज मतदाताओं या उनके परिवार के सदस्यों के नामों का मिलान किया जाता है। आयोग ने यह सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रिया में बदलाव किए हैं कि जिन मतदाताओं के नाम या उनके माता-पिता/रिश्तेदारों के नाम 2003 की सूची में पहले से हैं, उन्हें पुनरीक्षण के दौरान निवास या पहचान के अधिक दस्तावेज़ जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, अनुमान है कि लगभग 70% मतदाताओं को कोई दस्तावेज़ नहीं देना होगा यदि उनका नाम या उनके परिवार के सदस्य का नाम 2003 की सूची में दर्ज है।
चुनाव आयोग ने SIR की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और राजनीतिक दलों के सक्रिय सहयोग के लिए उनसे बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का आग्रह किया है। बिहार में हुए पहले चरण के SIR के बाद, जहाँ कुछ राजनीतिक विवाद उठे थे, आयोग अब विस्तृत चर्चा और प्रक्रिया को समझाने के लिए राजनीतिक दलों के साथ शुरुआती चरण में ही बैठकें कर रहा है। संक्षेप में, यह बैठक SIR की प्रक्रिया, इसके चरण और 2003 की आधार मतदाता सूची के उपयोग पर राजनीतिक दलों को विश्वास में लेने और उन्हें पूरी प्रक्रिया में हितधारक के रूप में शामिल करने की आयोग की एक महत्वपूर्ण पहल है।
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने देश के कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) के दूसरे चरण की घोषणा के बाद, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की हैं। इस पुनरीक्षण अभ्यास का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी पात्र नागरिक छूट न जाए और कोई भी अपात्र व्यक्ति शामिल न हो