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शशि थरूर ने पीएम मोदी पर लिखी लेख, सुप्रिया श्रीनेत ने कह दी बड़ी बात!

वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Updated Wed, 25 Jun 2025 10:18 AM IST

क्या कांग्रेस के ‘थिंक टैंक’ माने जाने वाले शशि थरूर पार्टी लाइन से अलग हो गए हैं? या फिर ये केवल एक ‘राष्ट्रीय हित’ को प्राथमिकता देने वाला वक्तव्य है? मंगलवार को कांग्रेस के भीतर एक सियासी हलचल तब शुरू हुई जब पार्टी सांसद डॉ. शशि थरूर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सार्वजनिक मंचों पर ‘ऊर्जा, गतिशीलता और लोगों से जुड़ने की इच्छा’ की प्रशंसा कर डाली। ये बात उन्होंने न केवल एक सार्वजनिक कार्यक्रम में कही बल्कि एक अंग्रेजी अखबार में छपे अपने लेख में भी दोहराई।

थरूर ने लिखा, “प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक मंचों पर सक्रियता और संवाद की तत्परता भारत के लिए एक अहम पूंजी है। लेकिन इसे और सहयोग और समर्थन की आवश्यकता है।”

इस लेख में भले ही थरूर ने ‘राष्ट्रीय एकता’ और ‘भारत के हित’ की बात की हो, लेकिन उनके इस बयान को लेकर कांग्रेस के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। क्या थरूर पार्टी लाइन से भटक रहे हैं? या वे अपनी अलग राजनीतिक पारी की बुनियाद रख रहे हैं?

जब थरूर की टिप्पणी को लेकर मीडिया ने कांग्रेस की प्रतिक्रिया मांगी, तो पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने साफ कर दिया कि यह कांग्रेस की राय नहीं है।

उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह उनकी अपनी व्यक्तिगत राय हो सकती है। यह कांग्रेस पार्टी की राय नहीं है। कांग्रेस ने अपने विचारों को साक्ष्य और प्रमाणों के साथ हमेशा प्रस्तुत किया है।”

साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति पूरी तरह से असफल रही है। अमेरिका की हालिया ट्रैवल एडवाइजरी का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “यह देश की प्रतिष्ठा को धक्का पहुंचाने वाला कदम है। सरकार को इस पर उच्च स्तर पर विरोध जताना चाहिए।”

सवालों की बौछार के बीच शशि थरूर ने मंगलवार को सफाई दी कि उनका यह लेख या बयान भाजपा में जाने का कोई इशारा नहीं है।

उन्होंने कहा, “कुछ लोग दुर्भाग्यवश इसे भाजपा में शामिल होने का संकेत मान रहे हैं। यह राष्ट्रीय एकता और भारत के हित में लिखा गया बयान है। मैंने संयुक्त राष्ट्र में 25 साल सेवा दी है और भारत की सेवा के लिए वापस आया हूं।”

थरूर ने यह भी बताया कि उनका लेख “ऑपरेशन सिंदूर” की सफलता और उसमें सभी राजनीतिक दलों की एकजुटता को लेकर था। यह ऑपरेशन उन भारतीयों की वापसी से जुड़ा है जिन्हें संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से निकाला गया।

पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि शशि थरूर पहले भी कई बार ऐसे बयान दे चुके हैं जो कांग्रेस की आधिकारिक लाइन से मेल नहीं खाते। उनका पीएम मोदी की सार्वजनिक छवि की तारीफ करना या कभी-कभी सरकार की कुछ योजनाओं को ‘सराहनीय’ बताना, पार्टी नेतृत्व को असहज करता रहा है।

हालांकि, शशि थरूर को कांग्रेस के ‘बौद्धिक चेहरे’ के रूप में देखा जाता है और उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव पार्टी के लिए पूंजी रहा है। लेकिन बार-बार की गई इस तरह की ‘व्यक्तिगत टिप्पणियों’ से कांग्रेस नेतृत्व के साथ उनके संबंधों में दरार की अटकलें अब और गहराती दिख रही हैं।

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि ऐसे बयान भारतीय राजनीति में अक्सर ‘पॉलिटिकल शिफ्ट’ या ‘नया रास्ता तलाशने’ का संकेत होते हैं। खासकर तब, जब ऐसे नेता लगातार पार्टी की लाइन से अलग चलते दिखें।

हालांकि शशि थरूर ने इसे सिरे से नकार दिया है, लेकिन जिस तरह से यह विवाद उठा है, उससे उनके अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, “राजनीति में एक सधी हुई तारीफ भी कई बार आने वाले गठजोड़ों की भूमिका तैयार करती है। थरूर जैसे वरिष्ठ नेता के मामले में कांग्रेस नेतृत्व की प्रतिक्रिया काफी अहम होगी।”

एक साधारण सा लेख, जिसमें एक प्रधानमंत्री की वैश्विक मंचों पर सक्रियता की तारीफ की गई, अब कांग्रेस के लिए सिरदर्द बन गया है। थरूर की पंक्तियों ने एक बार फिर इस पुरानी पार्टी को विचारधारात्मक और रणनीतिक असमंजस के कटघरे में खड़ा कर दिया है।

क्या यह केवल एक सांसद की व्यक्तिगत राय है? या यह भविष्य की किसी नई राजनीतिक पहेली की पहली कड़ी? जवाब आने वाले दिनों में स्पष्ट होंगे। लेकिन फिलहाल, कांग्रेस के भीतर थरूर का यह बयान सियासी भूचाल का कारण बन चुका है।

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