मोहर्रम पर कानपुर में अलम का जुलूस निकाला गया। हीरामन के पुरवा से नवाबगंज के बड़े कर्बला तक निकले इस जुलूस को मन्नतों का जुलूस भी कहते हैं। इसमें सबसे आगे पैगियां पंजतन का निशान लेकर चल रहे थे और मन्नत मांगने वालों का मजमा साथ में चल रहा था। 20 किलोमीटर की दूरी पार करने के बाद जुलूस में शामिल ताजियों को बड़े कर्बला में दफना दिया गया।