लखनऊ में हुई भीषण आग की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जिस जगह कुछ देर पहले तक जिंदगी अपनी सामान्य रफ्तार से चल रही थी, वहां अचानक उठीं आग की लपटों ने सब कुछ बदल दिया... देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और लोगों के सपने, मेहनत और उम्मीदें जलकर खाक में मिल गईं...
घटना के बाद का मंजर बेहद दर्दनाक था। कोई अपने परिजन को तलाश रहा था, तो कोई अपने घर और सामान को जलते हुए देखकर बेसुध हो गया... चीख-पुकार, आंखों में आंसू और दिल में डर—हर तरफ सिर्फ दर्द ही दर्द दिखाई दे रहा था... जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया, उनके लिए ये हादसा केवल एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का ऐसा जख्म बन गया है जिसे भर पाना आसान नहीं होगा...
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग इतनी तेजी से फैली कि लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। कई लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए हरसंभव कोशिश की, जबकि दमकल कर्मियों और राहत-बचाव दल ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया...
हादसे के बाद अस्पतालों में अपनों की सलामती की दुआ मांगते परिजनों की भीड़ उमड़ पड़ी। किसी की आंखें अपने बेटे को ढूंढ रही थीं, तो कोई मां अपने बच्चे की एक झलक पाने के लिए बेचैन थी। हर चेहरे पर चिंता और हर दिल में एक ही सवाल था "आखिर यह सब कैसे हो गया...?"
एक मां बेबस होकर फूट-फूटकर रोती नजर आई... और सिर्फ यही कह रही थी कि उसके बच्चे ने उसकी आंखों के सामने तड़प तड़पकर जान दे दी... हादसे में जान गंवाने वाले आदित्य श्रीवास्तव के मामा रविन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि आदित्य ने अपनी मां की आंखों के सामने दम तोड़ दिया. ये घटना परिवार के लिए किसी बड़े सदमे से कम नहीं है...