पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अब पार्टी सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को उस वक्त बड़ा झटका लगा, जब उनकी करीबी मानी जाने वाली वरिष्ठ नेता और बारासात से सांसद काकोली घोष ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया।
काकोली घोष का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब टीएमसी पहले से ही अंदरूनी असंतोष और नेताओं की नाराजगी से जूझ रही है। लंबे समय तक पार्टी का अहम चेहरा रहीं काकोली घोष लोकसभा में टीएमसी की चीफ व्हिप भी रह चुकी हैं। लेकिन हाल ही में पार्टी नेतृत्व ने उन्हें हटाकर कल्याण बनर्जी को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी। माना जा रहा है कि इसी फैसले से वह बेहद नाराज थीं।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में काकोली घोष ने दर्द भी जाहिर किया। उन्होंने लिखा- “1976 से जुड़ाव और 1984 से राजनीतिक सफर शुरू हुआ। आज मुझे चार दशकों की वफादारी का इनाम मिला है।” इस पोस्ट के बाद से ही उनके पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो गई थीं।
इतना ही नहीं, काकोली घोष ने हाल ही में टीएमसी के बारासात संगठनात्मक जिला अध्यक्ष पद से भी इस्तीफा दे दिया था। अपने इस्तीफे में उन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति संभालने वाली आईपैक टीम पर भी सवाल उठाए थे। इससे साफ संकेत मिला कि पार्टी के भीतर असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है।
राजनीतिक हलकों में हलचल उस वक्त और बढ़ गई, जब काकोली घोष छह अन्य टीएमसी विधायकों के साथ कल्याणी में आयोजित प्रशासनिक समीक्षा बैठक में शामिल हुईं। इस बैठक की अध्यक्षता पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की। बैठक में शामिल अन्य विधायकों में देगंगा से अनीसुर रहमान बिस्वास, स्वरूपनगर से बीना मंडल, हारोआ से मोहम्मद अब्दुल मतीन और बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य विधायक भी शामिल थे।
इसी बीच भाजपा ने भी टीएमसी की अंदरूनी कलह को लेकर बड़ा दावा किया है। भाजपा सांसद सौमित्र खान ने कहा है कि टीएमसी के करीब 50 विधायक और 20 सांसद पार्टी से नाराज हैं और भाजपा में शामिल होना चाहते हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व संकेत दे दे, तो टीएमसी में बड़ी टूट हो सकती है।
सौमित्र खान ने कहा- “अगर भाजपा हाईकमान एक बार हां कर दे, तो टीएमसी पार्टी नहीं बचेगी। कई विधायक और सांसद हमारे संपर्क में हैं।” भाजपा के इस दावे ने बंगाल की राजनीति का तापमान और बढ़ा दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी के भीतर नेतृत्व और संगठन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। कई नेता खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं। वहीं, भाजपा लगातार टीएमसी के असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश में जुटी हुई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या काकोली घोष का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत है? क्या आने वाले दिनों में टीएमसी में और बड़ी टूट देखने को मिल सकती है? और क्या भाजपा बंगाल में इस राजनीतिक असंतोष का फायदा उठाने में सफल होगी?
फिलहाल, बंगाल की राजनीति में उठे इस नए तूफान ने ममता बनर्जी की चिंता जरूर बढ़ा दी है।