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IMD forecast on Monsoon 2026: मानसून पर IMD ने जताई चिंता देश के राज्यों में होगी 8 फीसदी कम बारिश!

Tue, 14 Apr 2026 04:30 AM IST
Bhaskar Tiwari वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम

आईएमडी ने हाल ही में दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर कुछ चिंता जताई है, जिसके अनुसार इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और देश में कुल वर्षा औसत से कम रहने की संभावना है। दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की अर्थव्यवस्था, विशेषकर कृषि क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि देश की बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है और सिंचाई का प्रमुख स्रोत बारिश ही है। आईएमडी के आकलन के अनुसार, इस बार कुछ वैश्विक और क्षेत्रीय मौसमी कारक मानसून की तीव्रता को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें समुद्री सतह के तापमान में बदलाव और वायुमंडलीय परिस्थितियाँ शामिल हैं। विशेष रूप से El Niño की स्थिति को एक प्रमुख कारण माना जा रहा है, जो आमतौर पर भारत में कमजोर मानसून और कम वर्षा से जुड़ी होती है।

आईएमडी के मुताबिक, यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है, खासकर खरीफ फसलों जैसे धान, मक्का और दालों की बुवाई और पैदावार प्रभावित हो सकती है। कम बारिश के कारण जलाशयों में पानी का स्तर घट सकता है, जिससे सिंचाई और पेयजल आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि किसानों की आय में कमी आने की आशंका रहती है। हालांकि, आईएमडी ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह एक प्रारंभिक अनुमान है और मानसून के दौरान परिस्थितियों में बदलाव संभव है, इसलिए समय-समय पर अपडेट जारी किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और संबंधित एजेंसियों को इस संभावित स्थिति को ध्यान में रखते हुए पहले से तैयारी करनी चाहिए, जैसे जल संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देना, सूखा-प्रभावित क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक योजनाएँ तैयार करना और किसानों को कम पानी में होने वाली फसलों के बारे में जागरूक करना। इसके साथ ही, मौसम पूर्वानुमान प्रणाली को और मजबूत बनाने की जरूरत है ताकि समय पर सटीक जानकारी उपलब्ध कराई जा सके।

कुल मिलाकर, आईएमडी की यह चेतावनी एक संकेत है कि आने वाला मानसून चुनौतीपूर्ण हो सकता है। हालांकि स्थिति पूरी तरह नकारात्मक नहीं है, लेकिन सावधानी और तैयारी के जरिए इसके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सरकार, किसान और आम नागरिक सभी को मिलकर संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर ध्यान देना होगा ताकि संभावित जल संकट और कृषि नुकसान से बचा जा सके।

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