पश्चिम बंगाल की चर्चित फलता विधानसभा सीट पर हुए ऐतिहासिक पुनर्मतदान के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा संदेश दे दिया है। मतगणना के 22वें राउंड तक भाजपा प्रत्याशी Debangshu Panda ने एकतरफा बढ़त हासिल करते हुए जीत लगभग तय कर ली है। चुनाव आयोग की आधिकारिक गिनती के मुताबिक भाजपा उम्मीदवार को 1,49,666 वोट मिले हैं और उनकी बढ़त 1.09 लाख वोटों से अधिक हो चुकी है। विजेता की औपचारिक घोषणा बाकी है, लेकिन राजनीतिक तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है।
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि इस चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा और वाम दलों के बीच सिमट गया। दूसरे स्थान पर सीपीएम समर्थित उम्मीदवार शंभू नाथ कुर्मी रहे, जिन्हें 40,645 वोट मिले। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी अब्दुर रज्जाक मोल्ला तीसरे नंबर पर रहे और उन्हें करीब 10 हजार वोट मिले। सबसे बड़ा झटका सत्तारूढ़ All India Trinamool Congress को लगा, जिसके उम्मीदवार जहांगीर खान चौथे स्थान पर पहुंच गए और उन्हें केवल 7783 वोट ही मिले।
मतगणना के शुरुआती दौर से ही भाजपा ने निर्णायक बढ़त बना ली थी। दोपहर तक 15वें राउंड की गिनती में भाजपा उम्मीदवार 69 हजार से अधिक वोटों से आगे चल रहे थे। जैसे-जैसे राउंड आगे बढ़ते गए, अंतर लगातार बढ़ता गया और शाम तक यह बढ़त एक लाख के पार पहुंच गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पुनर्मतदान में मतदाताओं ने साफ संदेश देने की कोशिश की है।
फलता सीट इस बार सिर्फ चुनावी मुकाबले की वजह से नहीं बल्कि विवादों के कारण भी राष्ट्रीय सुर्खियों में रही। 29 अप्रैल को दूसरे चरण के मतदान के दौरान कई बूथों पर ईवीएम से छेड़छाड़ और गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे थे। शिकायतों में कहा गया था कि ईवीएम मशीनों पर इत्र जैसी कोई चीज और चिपचिपे टेप लगाए गए थे। इसके अलावा कई बूथों पर वेब कैमरों के फुटेज के साथ छेड़छाड़ की कोशिशों की भी बात सामने आई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए Election Commission of India ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए फलता विधानसभा क्षेत्र के सभी 285 बूथों पर मतदान रद्द कर दिया था। इसके बाद 21 मई को पूरे विधानसभा क्षेत्र में दोबारा मतदान कराया गया। चुनाव आयोग के इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में बड़ा कदम माना गया।
पुनर्मतदान के दौरान सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। पूरे क्षेत्र में केंद्रीय बलों की लगभग 35 कंपनियां तैनात की गई थीं। मतदान केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी गई ताकि किसी तरह की गड़बड़ी दोबारा न हो सके। सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतदाताओं ने भी भारी उत्साह दिखाया और करीब 87 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो इस सीट के लिए रिकॉर्ड माना जा रहा है।
चुनाव को और नाटकीय तब बना दिया जब पुनर्मतदान से ठीक दो दिन पहले टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी। हालांकि पार्टी ने इसे उनका व्यक्तिगत फैसला बताया, लेकिन इस घटनाक्रम ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया। इसके बाद माना जाने लगा था कि मुकाबला पूरी तरह बदल सकता है और नतीजों में इसका असर साफ दिखाई भी दिया।
फलता सीट के नतीजों को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा संकेत माना जा रहा है। भाजपा की भारी बढ़त ने यह दिखाया है कि विवादों और पुनर्मतदान के बाद मतदाता इस बार स्पष्ट जनादेश देने के मूड में थे। वहीं टीएमसी का चौथे स्थान पर पहुंचना पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब सभी की नजर चुनाव आयोग की औपचारिक घोषणा और उसके बाद आने वाली राजनीतिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी है।