आंध्र प्रदेश के कोनासीमा जिले के अमलापुरम में चक्रवात ‘अर्नब’ के प्रभाव से तेज हवाएं चलने और भारी बारिश होने की खबर सामने आई है। खराब मौसम को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां सतर्क हैं। वहीं, ओडिशा में चक्रवात के संभावित प्रभाव को लेकर भी सुरक्षा तैयारियां तेज कर दी गई हैं। ओडिशा के ADG (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार ने बताया कि फिलहाल राज्य पर चक्रवात के गंभीर प्रभाव की आशंका अपेक्षाकृत कम लग रही है, लेकिन कई स्थानों पर तेज हवाएं दर्ज की गई हैं और बारिश भी हो रही है। मौसम की स्थिति को देखते हुए प्रशासन किसी भी संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और प्राकृतिक आपदा के कारण होने वाले नुकसान को कम करना है।
संजय कुमार के मुताबिक, प्रशासन को सबसे अधिक चिंता बाढ़ आने और रात के समय पेड़ों के गिरने की है। लगातार बारिश के कारण कुछ इलाकों में जलभराव या बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। इसके अलावा, संवेदनशील क्षेत्रों में भूस्खलन होने और सड़कों पर पेड़ गिरने से यातायात बाधित होने की आशंका भी जताई गई है। ऐसी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए दक्षिणी ओडिशा के सात जिलों में ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) की 20 टीमें तैनात की गई हैं। इन टीमों को तीन-तीन भागों में संगठित किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर अलग-अलग स्थानों पर राहत और बचाव कार्य तेजी से शुरू किए जा सकें। प्रशासन की कोशिश है कि किसी भी प्रभावित इलाके तक आपातकालीन सहायता पहुंचाने में देरी न हो।
प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की योजना भी बनाई है। पुलिस की ओर से इस प्रक्रिया में सहायता दी जा रही है, ताकि संवेदनशील और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर सुरक्षित आश्रय स्थलों तक पहुंचाया जा सके। जो लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित शिविरों में जा रहे हैं, उनके घरों और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए पुलिस ने गश्त बढ़ा दी है। इसका उद्देश्य आपदा के दौरान चोरी या अन्य अप्रिय घटनाओं की आशंका को कम करना है। इसके साथ ही संचार व्यवस्था बनाए रखने के लिए वीएचएफ यानी वेरी हाई फ्रीक्वेंसी संचार उपकरण लगाए गए हैं, ताकि सामान्य संचार सेवाएं प्रभावित होने पर भी राहत एवं बचाव दल एक-दूसरे से संपर्क कर सकें। संजय कुमार ने कहा कि प्रशासन आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा नहीं होने देने का प्रयास कर रहा है।
राहत और बचाव अभियान को प्रभावी बनाने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें भी तैनात हैं। पुलिस, ODRAF, NDRF और जिला प्रशासन के बीच समन्वय स्थापित किया गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि बाढ़, भूस्खलन, पेड़ों के गिरने और यातायात बाधित होने जैसी संभावित परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयारियां की जा रही हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें, अनावश्यक यात्रा से बचें तथा तेज हवाओं के दौरान पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें। किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन द्वारा बताए गए सुरक्षित आश्रय स्थलों का उपयोग करना चाहिए। चक्रवात के वास्तविक प्रभाव का आकलन मौसम की स्थिति और आधिकारिक पूर्वानुमानों के आधार पर किया जाएगा