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जेल में नहीं मिली ये सुविधाएं तो भड़क गए आजम खां

अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Updated Fri, 21 Nov 2025 05:10 PM IST

सपा के कद्दावर नेता और यूपी के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां इन दिनों सीतापुर जेल में बंद हैं, जहां पिछले दो दिनों में उनकी नाराजगी लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। मामला शुरू हुआ उनके उस आग्रह से, जिसमें उन्होंने जेल प्रशासन से स्वास्थ्य का हवाला देते हुए बैठने के लिए कुर्सी मांगी। जेल प्रशासन ने जेल मैनुअल का हवाला देकर उनकी मांग ठुकरा दी, जिसके बाद आजम खां भड़क गए और अपने बेटे व बहन से मुलाकात करने से भी मना कर दिया।

कुर्सी की मांग पर जेल प्रशासन सख्त

जेल प्रशासन के अनुसार, आजम की उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए कई सुविधाएं पहले ही उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन जेल नियमों के अनुसार कुर्सी देने का प्रावधान नहीं है। जेलर सुनील सिंह ने साफ कहा कि “कुर्सी देने की अनुमति जेल मैनुअल में नहीं है, इसलिए यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकती।”
कुर्सी न मिलने से नाराज़ होकर आजम ने मुलाकात को रद्द कर दिया, जिससे जेल परिसर में तनाव की स्थिति पैदा हो गई। शाम तक कई अधिकारी उन्हें समझाने में लगे रहे।

आजम खां ने बृहस्पतिवार को लिखित में कोर्ट के आदेश की प्रति मांगी थी। उनका कहना था कि वकील से मीटिंग के दौरान उन्हें आदेश के बारे में जानकारी मिली, इसलिए वे उसकी प्रति देखना चाहते हैं। जेल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए कोर्ट का आदेश उन्हें उपलब्ध करा दिया। इससे पहले बुधवार को जब वे अपने वकीलों से मिले थे, तभी उन्होंने इस दस्तावेज को देखने की इच्छा जताई थी।

सोमवार रात आजम ने अपने परिवार से कंबल भेजने की अनुमति मांगी, जिसे जेल प्रशासन ने नियमों का हवाला देते हुए मंज़ूर नहीं किया। इस पर भी वे काफी नाराज हुए। हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए बृहस्पतिवार को जेल प्रशासन ने उन्हें अतिरिक्त कंबल और चादर उपलब्ध कराई। ठंड बढ़ने के साथ ही अन्य कैदियों को भी ऐसी ही सुविधाएं दी जा रही हैं। जेल अधिकारी बताते हैं कि आजम के खाने को भी सुरक्षा कारणों से जेल स्टाफ की मौजूदगी में दिया जा रहा है।

बुधवार को आजम खां की कुछ दवाइयां खत्म हो गईं। जेल के स्टोर में ये दवाएं उपलब्ध नहीं थीं, जिसके बाद जेल डॉक्टर की सलाह पर बाजार से दो दवाइयां खरीदकर उन्हें उपलब्ध कराई गईं। जेल प्रशासन का कहना है कि आजम की सेहत पर पूरी नजर रखी जा रही है और उन्हें हर जरूरी सुविधा दी जा रही है।

जेल में आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की मौजूदगी के बाद जेल सुरक्षा को और मजबूत किया गया है। जेल अधीक्षक ने बताया कि बाहर अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और अंदर भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। एसपी विद्यासागर मिश्र ने पुष्टि की कि “विशेष राजनीतिक बंदियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त फोर्स लगाई गई है।”

जेल नियमों के अनुसार कोई भी कैदी महीने भर में चार मुलाकातें कर सकता है। पहले 15 दिनों में दो और अगले 15 दिनों में दो मुलाकातों की अनुमति होती है। हालांकि वकीलों से मिलने की संख्या पर कोई प्रतिबंध नहीं है।

इसी बीच आजम के बेटे पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के खिलाफ चल रहे दो पासपोर्ट मामले की सुनवाई भी तेज हो गई है। यह मामला 2019 में बीजेपी विधायक आकाश सक्सेना की शिकायत पर दर्ज किया गया था। आरोप है कि अब्दुल्ला के पास दो अलग-अलग पासपोर्ट थे, जिनमें से एक का इस्तेमाल विदेश यात्रा में किया गया।
सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद अब इस मामले की नियमित सुनवाई चल रही है। बृहस्पतिवार को अभियोजन पक्ष ने बहस शुरू की, जो अभी जारी है। अगली सुनवाई 26 नवंबर को तय की गई है।

कुर्सी, कंबल और कोर्ट आदेश को लेकर आजम और जेल प्रशासन के बीच विवाद जेल की सख्त व्यवस्था और राजनीतिक बंदियों की संवेदनशील स्थिति को एक बार फिर सामने लाता है। बढ़ती सुरक्षा और जारी कानूनी लड़ाइयों के बीच आजम खां का जेल अध्याय लगातार राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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