55 दिन खुली हवा में सांस लेने के बाद सपा नेता आजम खां और उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम को एक बार फिर जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा है। दो पैनकार्ड मामले में अदालत से दोषी ठहराए जाने के बाद दोनों को सोमवार को कड़ी सुरक्षा के बीच रामपुर की जिला जेल भेजा गया। फिलहाल, दोनों को जेल की बैरक नंबर-1 में रखा गया है, जिसे लंबी सजा पाए आरोपियों की बैरक माना जाता है और यहां सीसीटीवी की कड़ी निगरानी रहती है।
राजनीति में मजबूत पकड़, अब कानूनी मुश्किलों में फंसा परिवार
सपा के कद्दावर नेता आजम खां उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा कद रखते हैं। वह रामपुर विधानसभा सीट से दस बार विधायक रह चुके हैं और प्रदेश सरकार में चार बार कैबिनेट मंत्री का पद संभाल चुके हैं। इसके अलावा 2019 में वह रामपुर से लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे। वहीं उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा भी विधायक और राज्यसभा सदस्य रह चुकी हैं। उनके पुत्र अब्दुल्ला आजम 2017 में पहली बार विधायक बने थे, लेकिन उम्र विवाद में उनकी विधायकी हाईकोर्ट ने निरस्त कर दी थी। बाद में 2022 में वह स्वार सीट से दोबारा चुने गए।
अब्दुल्ला की उम्र पर विवाद कहां से शुरू हुआ मामला?
दरअसल, अब्दुल्ला आजम के शैक्षिक प्रमाणपत्रों में जन्म तिथि 01 जनवरी 1993 दर्ज है। इस हिसाब से वह 2017 के विधानसभा चुनाव में न्यूनतम आयु की शर्त पूरी नहीं करते थे। आरोप है कि चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने अपनी जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 दर्शाई, जिस आधार पर उम्र पूरी मानी गई।
इस पर बसपा प्रत्याशी रहे नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर की। लंबी सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने 2017 में अब्दुल्ला की विधायकी निरस्त कर दी। सुप्रीम कोर्ट ने भी हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
दो पैनकार्ड केस में कोर्ट ने माना दोषी
सत्ता परिवर्तन के बाद भाजपा नेता और वर्तमान रामपुर शहर के विधायक आकाश सक्सेना ने दो जन्म प्रमाणपत्र और बाद में दो पैनकार्ड का मामला दर्ज कराया था। 16 दिसंबर 2019 को सिविल लाइंस कोतवाली में आजम खां और अब्दुल्ला के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। शिकायत के अनुसार, आयकर विभाग ने अब्दुल्ला को पैन कार्ड संख्या D F O P K 6164 जारी किया था, जिसमें उनकी जन्म तिथि एक जनवरी 1993 थी। यही उनकी बैंक खाता संचालन और आयकर रिटर्न जमा करने में इस्तेमाल होता रहा।
आरोप है कि 2017 में नामांकन दाखिल करते समय अब्दुल्ला ने अपनी बैंक पासबुक में पैन नंबर को कूटरचित तरीके से बदलकर एक अलग पैन कार्ड नंबर दर्शाया, जो उस समय एक्टिव भी नहीं था। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया ताकि चुनाव में उम्र संबंधी अयोग्यता छिपाई जा सके और चुनाव लड़ने का लाभ प्राप्त किया जा सके।
पहले जन्म प्रमाणपत्र मामले में मिल चुकी है 7-7 साल की सजा
इससे पहले, एमपी-एमएलए कोर्ट ने 18 अक्टूबर 2023 को दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में आजम खां, उनकी पत्नी तजीन फात्मा और बेटे अब्दुल्ला को सात-सात साल की सजा और 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि इस मामले में उन्हें हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
रामपुर जेल में क्या है व्यवस्था?
जेलर सुनील सिंह के अनुसार, दोनों को बैरक नंबर-1 में रखा गया है। यह बैरक हाई-रिस्क कैदियों के लिए मानी जाती है और पूरी तरह सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में रहती है। सुरक्षा व्यवस्था सख्त है और फिलहाल दोनों को सामान्य जेल रूटीन के अनुसार रखा जा रहा है।
55 दिन बाद फिर सलाखों के पीछे
23 सितंबर को आजम खां और 25 फरवरी को अब्दुल्ला को जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आए थे। लेकिन दो पैनकार्ड मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद अब 55 दिन के भीतर उन्हें दोबारा कैद का सामना करना पड़ा है। इस फैसले ने न सिर्फ रामपुर की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि सपा खेमे में भी चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि आजम परिवार को लगातार कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।