रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल होने वाली महंगी विदेशी तकनीक का सस्ता स्वदेशी विकल्प विकसित करने की दिशा में एनआईटी हमीरपुर के छात्रों ने अहम पहल की है। संस्थान के छात्रों ने कम लागत वाली प्रिसिजन गाइडेड किट का मॉडल तैयार किया है, जो बिना मार्गदर्शन वाले तोप के गोलों को अधिक सटीकता से लक्ष्य तक पहुंचाने में मदद कर सकती है। छात्रों की ओर से तैयार किए गए इस मॉडल का प्रयोगशाला में करीब 600 रुपये के प्रोटोटाइप के माध्यम से परीक्षण किया गया है। टीम का दावा है कि सैन्य स्तर पर तैयार किए जाने वाले संस्करण की अनुमानित लागत करीब दो लाख रुपये हो सकती है। इसके मुकाबले विदेशी मार्गदर्शन किट की कीमत कई गुना अधिक बताई जाती है। एनआईटी हमीरपुर की टीम ‘वेक्टर विक्टिम्स’ के इस प्रोजेक्ट को स्मार्ट इंडिया हैकथॉन-2026 के संस्थान स्तर पर प्रथम स्थान मिला है। टीम में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के अनुज केसरी, शिवांश, भूपेंद्र और कार्तिकेय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग की मुस्कान और पंकज शामिल हैं। अब टीम राष्ट्रीय ऑनलाइन चरण में हिस्सा लेगी। इसमें सफलता मिलने पर विद्यार्थियों को दिल्ली में आयोजित होने वाले ग्रैंड फिनाले में अपना शोध प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। छात्रों ने इस परियोजना को ‘लो-कॉस्ट प्रिसिजन गाइडेंस एंड स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक फ्यूज सिस्टम’ नाम दिया है। विद्यार्थियों के अनुसार, 600 रुपये के परीक्षण मॉडल के माध्यम से तकनीक की अवधारणा और गणितीय मॉडल का प्रयोगशाला में परीक्षण किया गया। मॉडल में कम लागत वाले इलेक्ट्रॉनिक और सेंसर आधारित हिस्सों का उपयोग किया गया है। यह प्रणाली इंटरनेट ऑफ थिंग्स पर निर्भर होने के बजाय एंबेडेड सिस्टम और गाइडेंस, नेविगेशन एंड कंट्रोल आधारित तकनीक पर काम करने की दिशा में विकसित की गई है। छात्रों का कहना है कि प्रस्तावित स्वदेशी प्रणाली में भारत के उपग्रह नेविगेशन सिस्टम नाविक और एंटी-जैमिंग हार्डवेयर के उपयोग की संभावना रखी गई है। इससे युद्ध जैसी परिस्थितियों में विदेशी नेविगेशन सेवाओं पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। टीम ने दावा किया है कि पारंपरिक 155 एमएम तोप के गोलों की तुलना में गाइडेड किट के उपयोग से निशाने की सटीकता में काफी सुधार हो सकता है। छात्रों के अनुसार, पारंपरिक गोलों से किसी लक्ष्य को भेदने के लिए कई बार गोले दागने पड़ सकते हैं। गाइडेड किट के उपयोग से कम गोला-बारूद में लक्ष्य साधने और परिवहन व परिचालन लागत घटाने की संभावना है। हालांकि, इन दावों की वास्तविक सैन्य उपयोगिता का आकलन आगे के तकनीकी परीक्षणों और विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद ही किया जा सकेगा। एनआईटी हमीरपुर के निदेशक एचएम सूर्यवंशी ने कहा कि संस्थान के हर विभाग में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए हैकाथॉन जैसे आयोजनों से विद्यार्थियों को मंच मिल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्र राष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर प्रदर्शन करेंगे।