क्षेत्र में सामाजिक सुरक्षा पेंशन को लेकर लाभार्थियों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। सुबह होते ही पेंशन कार्यालयों में महिलाओं और बुजुर्गों की लंबी कतारें लग जाती हैं। दूर-दराज गांवों से आने वाले लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक और शारीरिक दोनों तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पेंशन संबंधी ज्यादातर मामले परिवार पहचान पत्र और बैंक खातों में गड़बड़ी से जुड़े सामने आ रहे हैं। नाम, पता या बैंक डिटेल में मामूली अंतर के कारण पेंशन रुक रही है, जिससे लाभार्थियों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एक गांव की रहने वाली जीतो देवी ने बताया कि वह अपना बैंक खाता बदलवाने के लिए आई थीं। उन्होंने कहा कि पहले उनकी पेंशन नियमित आ रही थी, लेकिन अब अचानक बंद हो गई है। बैंक में गई तो बैंक कर्मचारियों ने कहा कि नाम में गड़बड़ी है, पेंशन विभाग से ठीक करवाकर आओ। यहां आने पर बताया गया कि रिकॉर्ड सही है, लेकिन बैंक वाले पेंशन जारी नहीं कर रहे। अब दूसरे बैंक में खाता खुलवाने को कहा जा रहा है।” इसी तरह साढौरा के गांव पम्मूवाला से आई साफिया ने अपनी परेशानी साझा करते हुए बताया कि वह अब तक चार बार पेंशन कार्यालय के चक्कर लगा चुकी हैं। हर बार नए कागजात मांगे जाते हैं। मैंने सभी दस्तावेज कई बार जमा करवा दिए, लेकिन अब तक पेंशन शुरू नहीं हुई। आने-जाने में काफी पैसा खर्च हो चुका है। कार्यालय में मौजूद अन्य महिलाओं ने भी बताया कि खाता बदलवाने, नाम सुधार और आधार लिंकिंग जैसी समस्याओं को लेकर उन्हें बार-बार बुलाया जा रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं को काफी परेशानी हो रही है, खासकर बुजुर्गों के लिए यह और भी मुश्किल हो जाता है। जिला समाज कल्याण अधिकारी सुरजीत कौर ने बताया कि पेंशन से जुड़ी समस्याओं का मुख्य कारण डाटा का मिलान न होना है। राशन कार्ड, पीपीपी आईडी और बैंक रिकॉर्ड में अंतर होने से पेंशन होल्ड हो जाती है। कर्मचारी मौके पर ही इन कमियों की जानकारी देकर सुधार करवा रहे हैं। कई बार गांवों में नाम या अन्य विवरण बदल जाने से भी समस्या आती है। यदि पेंशन तीन महीने तक नहीं आती है, तो सुधार के बाद लाभार्थियों को एरियर सहित राशि जारी कर दी जाती है। विभाग की ओर से छोटी-छोटी त्रुटियों को ठीक करने का काम लगातार किया जा रहा है, ताकि लाभार्थियों को जल्द राहत मिल सके।