समालखा-पानीपत। उपमंडल के गांव बिलासपुर में जमीन विवाद से जुड़े एक मामले में महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में जहरीला पदार्थ निगलने से मौत हो गई। महिला बबली की मौत के बाद समालखा सामान्य अस्पताल परिसर में माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया। परिजनों और ग्रामीणों ने पोस्टमार्टम हाउस के बाहर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। परिजनों का दावा है कि बबली ने जहरीला पदार्थ खाने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया है। इसमें उसने थाना बापौली के कुछ पुलिसकर्मियों को अपनी मौत का जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने मृतका के इकलौते बेटे कुलदीप को एक झूठे मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इससे मानसिक तनाव में आकर महिला ने यह कदम उठाया। परिजनों ने चेतावनी दी कि जब तक उनके बेटे को रिहा नहीं किया जाता और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, वे शव का पोस्टमार्टम नहीं कराएंगे। बढ़ते हंगामे को देखते हुए बापौली थाना प्रभारी पवन और समालखा थाना प्रभारी महिपाल पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। बापौली थाना प्रभारी ने आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि एक माह पहले जमीन विवाद में मां-बेटे पर मुकदमा दर्ज हुआ था और उच्च अधिकारियों के निर्देश पर ही बेटे को गिरफ्तार किया गया है। बेटे की गिरफ्तारी का सदमा नहीं सह पाई मां ग्रामीण रमेश और सत्यवान ने बताया कि बबली (42) का लड़का कुलदीप मारपीट के मामले में जेल में बंद हैं। पिता नरेंद्र की आठ वर्ष पहले मौत हो गई थी। एक अन्य लड़के सचिन की 2019 में हादसे में मौत हो गई थी। अब महिला का सहारा उनका बेटा कुलदीप था। बापौली थाना पुलिस ने कुलदीप को एक मामले में गिरफ्तार की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। एक मां के लिए बेटे की गिरफ्तारी का सदमा सहना आसान नहीं होता। उसने जमीनी विवाद और बेटे को जेल में जाने के बाद यह कदम उठाया है। उन्होंने बताया कि वीडियो और सुसाइड नोट के आधार पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। वर्जन : कथित सुसाइड नोट, वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की वैज्ञानिक व कानूनी जांच की जा रही है। निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई करेगी। नरेंद्र कादियान, डीएसपी, समालखा।