औद्योगिक नगरी में टीबी के मरीज दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। चिकित्सक इसका मुख्य कारण लोगों में जागरूकता की कमी बता रहे हैं। पिछले साल करीब 5413 टीबी के मरीज मिले थे और इस साल तीन महीने में ही करीब 1200 टीबी मरीज मिल चुके हैं। चिकित्सक लोगों को ज्यादा से ज्यादा जांच करवाने और अपना मुंह ढ़ंककर बाहर निकलने के सलाह दे रहे हैं। मुझे जिला नागरिक अस्पताल में टीबी उन्मूल कार्यक्रम से जुड़े हुए करीब एक साल हो चुका है। मेरा लक्ष्य ज्यादा से मरीजों की जांच करना और उन्हें इलाज से जोड़ना है क्योंकि जब तक लोगों की पहचान नहीं होगी तब तक बीमारी कैसे खत्म हो सकती है। इसलिए मेरी टीम ने फील्ड में रहकर लोगों की जांच करने का काम तेज कर दिया है। लोगों को चाहिए कि यदि खांसी दस दिन से ज्यादा रहती है तो वे अपनी टीबी की जांच अवश्य कराएं। यदि शाम को हल्का बुखार रहता है, शरीर में कोई गांठ बनी हुई है या खांसते समय बलगम में खून आते है तो टीबी की जांच अवश्य करानी चाहिए ताकि बीमारी को शुरूआत में ही रोका जा सके। वहीं टीबी मरीजों को खांसते समय मुंह पर कपड़ा रखना चाहिए, बलगम को मिट्टी के गड्ढे में दबाना चाहिए और सामाजिक स्थानों पर मुंह पर मास्क का प्रयोग करना चाहिए ताकि टीबी को फैलने से रोका जा सके।