करीब 3 माह पूर्व नगर परिषद की ओर से आवारा गोवंश को पकड़ने के लिए टेंडर छोड़े गए थे। तीन माह बीत जाने के बाद भी आवारा व बेसहारा गोवंश सड़कों पर तो नजर आ ही रहे हैं। जबकि हुडा सेक्टर में सुभाष पार्क के सामने खाली पड़ी जमीन पर 30 से 40 गोवंश कूड़े में मुंह मारते नजर आए। ऐसे में सवाल उठता है कि गोवंश को पकड़ने के लिए छोड़े गए टेंडर के बावजूद इतने गोवंश कहां से आ रहे हैं। गौरतलब है कि शहर का हुडा सेक्टर पॉश कॉलोनी में शुमार है और यहां पर इतनी तादाद में आवारा गोवंश का घूमना नप की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़ा करता है। ऐसे में गोवंश घास के साथ साथ पॉलीथिन भी निगल जाते हैं। जिसकी वजह से अनेकों बार इनकी तबीयत भी बिगड़ जाती है। शहर की गोशालाओं में हैं करीब 4000 गोवंश शहर में निजामपुर रोड व रेवाड़ी रोड पर दो गोशालाओं में 2500 गोवंश हैं, जबकि सुभाष चंद्र बोस स्टेडियम के पास मौजूद उपचारशाला में करीब 500 गोवंश मौजूद है। साथ ही सिंघाना रोड पर स्थित नंदीशाला में 750 के करीब नंदी मौजूद हैं। इतनी सुविधा होने के बाद भी बेसहारा गोवंश कूड़े में मुंह मारने को मजबूर हैं। लाखों रुपये का आता है दान इन सभी गोशालाओं में हर माह लाखों रुपये का दान दिया जाता है। जिसमें बड़े व्यापारी, अधिकारी, समाजसेवी व राजनीति से जुड़े लोग शामिल हैं, जो समय समय पर दान देते रहते हैं। इसके अलावा आए दिन यहां पर लोग गोवंश के लिए सवामनी का आयोजन भी करते रहते हैं। बेसहारा गोवंश को पकड़ने का कार्य चल रहा है। इतनी तादाद में यदि गोवंश शहर में विचरण कर रहे हैं तो इसकी जांच जरूर करवाई जाएगी। जल्द ही इस समस्या से छुटकारा दिलाया जाएगा। -कमलेश सैनी, चेयरपर्सन, नगर परिषद, नारनौल।