योग गुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि कुरुक्षेत्र की धरा पर केवल 21 हजार बच्चों द्वारा गीता पाठ करने का कार्यक्रम नहीं बल्कि यहां से गीता के साथ राष्ट्र धर्म और युग धर्म का शंखनाद हुआ है। वैश्विक गीता पाठ के दौरान उन्होंने जहां अपने संबोधन में गीता को ही जीवन बनाने का आह्वान किया वहीं कहा कि आज के बच्चे ही विकसित भारत का आधार बनने हैं। ऐसे में हर बच्चे को गीता व योग से जुड़कर मन व तन को स्वस्थ करना चाहिए। हमें शिक्षा, स्वास्थ्य, चरित्र, ज्ञान, विज्ञान में अनूठा उदाहरण बनना चाहिए। योग गुरु ने बाद में पत्रकारों से चर्चा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री नायब सैनी खुद गीता को जीते हैं। गीता के ज्ञान योग, भक्ति योग, कर्म येाग की त्रिवेणी को जीते हुए विकसित भारत का सपना पूरा करना होगा। गीता हमें निडर बनाती है तो मानसिक, शारीरिक व हर प्रकार से स्वस्थ भी बनाती है। गीता हमें लक्ष्य पूरा करने का साहस देती है।