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कुरुक्षेत्र: समाज से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के वकीलों ने ठानी तो छह साल बाद मिल पाया पीड़ित किशोरी को न्याय

शाहिल शर्मा Updated Tue, 24 Mar 2026 10:31 PM IST

पांच माह तक शारीरिक यातना सहने वाली पीड़िता को आखिरकार छह साल बाद न्याय मिला है। परंतु पीड़िता के लिए न्याय की डगर चुनौतियों भरी रही। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वह सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सके। आखिर में समाज के लोगों व जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के वकील प्रोबोनो (यानी बिना फीस) के तहत आगे आए तो पीड़िता को न्याय मिल सका। पीड़िता का उस समय हौंसला टूटने लगा था, जब दोषियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई तो समाज के लोग आगे आए और वकीलों से संपर्क कर पीड़िता की पूरी आपबीती सुनाई। वकीलों का दिल पसीजा और दोषियों की जमानत को सुप्रीम कोर्ट से रद्द करवाया। वकीलों ने पीड़िता को हौंसला दिया की वह दोषियों को सजा और उन्हें न्याय जरूर दिलाएंगे। पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता राजकुमार कश्यप, हरविंद्र सिंह और प्रवीन त्यागी ने पत्रकारों से चर्चा में बताया कि दोषी मजबूत परिवार से आते हैं और उन्होंने पीड़िता को डराने धमकाने से लेकर लालच देकर मामला वापस लेने तक का दबाव डाला। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई कश्यप समाज के सेवानिवृत्त डीएसपी कर्ता राम, तरशेम, करनाल के रहने वाले अनूप व जिला परिषद की उपाध्यक्ष परमजीत कौर के सहयोग के बिना नहीं जीती जा सकती थी। डीएसपी ने पीड़िता को बताया था मंदबुद्धि वकीलों ने आरोप लगाए कि जांचकर्ता डीएसपी ने खुद एक महिला होते हुए पीड़िता का दर्द नहीं समझा और उसे मंदबुद्धि करार दे दिया। पीड़िता के अदालत में आरोपियों को पहचाने के बाद अदालत ने माना कि पीड़िता मंदबुद्धि नहीं है और उसके मेडिकल करवाने के आदेश दिए। वकीलों ने कहा कि दोषियों ने पुलिस कार्रवाई को धन-बल के माध्यम से प्रभावित करने का प्रयास किया था, लेकिन वह अपने मनसूबों में कामयाब नहीं हो पाए। मामले में पीड़िता सहित 44 गवाही हुई, 76 पेज का फैसला मुकदमें में कुल 44 गवाही हुई। इसमें पीड़िता से लेकर मेडिकल करने वाले चिकित्सक, जांच करने वाले पुलिस कर्मी व अन्य कई लोग शामिल थे। कई गवाहों की तो कई-कई बार गवाही हुई। छह साल तक चले इस मामले में अंत में अदालत ने 76 पेजों का फैसला पड़ कर सुनाया। वकीलों ने बताया कि दोषी मामले में हाईकोर्ट में जाएंगे परंतु वकील वहां भी प्रोबोनो के तहत इस मुकदमे को वहां भी लड़ेगे। बॉक्स जांच में दोषी महिला के फोन में और भी आपत्तिजनक सामग्री मिली अदालत के समक्ष जांच में दोषी महिला के मोबाइल में एक वीडियो भी मिली है, जिसमें एक नाबालिग के साथ कुछ हरकत होती दिखाई दे रही है और छह लोग मौजूद है। इसी महिला ने पीड़िता को आगे से आगे दोषियों को बेचा था। कोर्ट ने मोबाइल में मिली सामग्री की जांच करने के आदेश भी दिए हैं। बॉक्स सुकून मिला पर लेकिन अभी अधूरा पीड़िता के पिता ने बताया कि उन्हें इस फैसले से कुछ सुकून मिला है। परंतु पूरा सकुन तब मिलेगा जब फरार चल रहे आरोपियों की भी सजा होगी। उनकी पांच बेटियों में यह सबसे छोटी बेटी है, जो आज भी इस दर्द के डर को याद कर कांप उठती है। उन्होंने समाज के लोगों व संबंधित अधिवक्ताओं का आभार भी जताया।

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