कुरुक्षेत्र। जिले में लंपी बीमारी को लेकर पशुपालन विभाग सतर्क है। हालांकि फिलहाल जिले में लंपी का कोई भी पॉजिटिव मामला सामने नहीं आया है। हालांकि अलग-अलग स्तर पर लैब भेजे गए 60 सेंपलों की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। वहीं, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की टीम भी 10 सैंपल ले चुकी है। कुछ समय पहले जिले के कई गांवों में गोवंश में लंपी जैसे लक्षण दिखाई देने लगे थे। करीब दो से तीन माह पहले शुरुआती दौर में लगभग हर गांव में तीन से चार गोवंश में इस तरह के लक्षण मिलने की सूचना सामने आने लगी थी। इसके बाद बीमारी के नियंत्रण और रोकथाम के लिए पशुपालन विभाग की ओर से जिलेभर में अभियान चलाया गया। अभियान के तहत गोवंश का स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ-साथ टीकाकरण पर भी जोर दिया गया। विभाग के अनुसार अब तक जिले में करीब 93 हजार में से 75 हजार 202 गोवंश को लंपी से बचाव के लिए इंजेक्शन लगाए जा चुके हैं। संदिग्ध पशुओं के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं। बॉक्स 40 सैंपलों की रिपोर्ट का इंतजार पशुपालन विभाग की ओर से 30 सेंपल सोनीपत स्थित जांच लैब भेजे गए हैं तो वहीं 30 सेंपल लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को भी भेजे जा चुके हैं। हालांकि फाइनल जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक ये सेंपल पॉजिटिव नहीं पाए गए हैं। इसके अलावा लुआस की टीम भी जिला में दस्तक दे चुकी है और संबंधित गोवंश से बीमारी जांच के लिए 10 सैंपल लिए गए, जिनकी जांच रिपोर्ट भी अभी बाकी है। उम्मीद की जा रही है कि एक सप्ताह तक इन सेंपलों की रिपोर्ट आएगी। वहीं विभाग की टीमें गांवों में निगरानी बनाए हुए हैं और पशुपालकों को बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत विभाग को सूचना देने के लिए कहा जा रहा है। बॉक्स अभी कोई पॉजिटिव केस नहीं : डॉ विकास विभाग के उपनिदेशक डॉ विकास शर्मा के अनुसार फिलहाल जिले में लंपी बीमारी का कोई पॉजिटिव मामला नहीं है। पशुओं में बीमारी के संभावित लक्षणों को देखते हुए एहतियात के तौर पर 27 जुलाई से जांच और टीकाकरण अभियान शुरू किया गया था और अब तक 75 हजार 202 गोवंश को टीके लगाए जा चुके हैं। वहीं पिछले एक सप्ताह से किसी ऐसे गाेवंश की रिपोर्ट नहीं आ रही, जिसमें इस बीमारी के लक्षण हो। जिले भर से हर रोज रिपोर्ट ली जा रही है। बॉक्स पशु विशेषज्ञों के मुताबिक ये हैं लंपी बीमारी के लक्षण - तेज बुखार, सुस्ती, भूख न लगना, दूध में कमी, गोल व उभरी हुई त्वचा की गांठ, लिम्फ नोडस में सूजन, आंख व नाक से स्राव, पैरों, थन और ब्रिस्केट क्षेत्र में सूजन। विभाग के उपनिदेशक डॉ विकास शर्मा के मुताबिक यह संक्रामक बीमारी है,जिसके चलते पशुपालक को सावधानी बरते जाने की जरूरत है। पशु को साफ सुथरा खाना व वातावरण दें। संक्रमित पशुओं को अन्य पशुओं से दूर रखना चाहिए। लक्षण दिखाई देने पर तत्काल पशु विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।