फरल स्थित प्राचीन काली माता मंदिर के प्रांगण में 7 मई से आरंभ हुई 41 दिवसीय पंच धुनी तपस्या अब अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। यह कठिन साधना माता सरस्वती पुरी द्वारा की जा रही है, जो अपनी आध्यात्मिक साधना, तप और भक्ति के लिए विख्यात हैं। पंच धुनी तपस्या एक अत्यंत कठिन साधना मानी जाती है, जिसमें सरस्वती माता चारों ओर धधकती धूनी (अग्नि) के बीच बैठकर तप करती हैं और ऊपर से सूर्य की तपन को भी सहन करती हैं। यह साधना शरीर और मन दोनों की परीक्षा होती है, और ऐसी साधना बहुत ही विरले साधु-संत ही करते हैं। मंदिर परिसर में भक्तों का प्रतिदिन तांता लगा हुआ है। माता सरस्वती पुरी के दर्शन करने और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने हेतु दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। तपस्या के दौरान भजन-कीर्तन, धार्मिक प्रवचन और अन्य आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। इस तपस्या का समापन 16 जून को हवन व भंडारे के आयोजन के साथ होगा।