फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झज्जर: चंद्र ग्रहण के कारण श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे मंदिरों के मुख्य द्वार

शाहिल शर्मा Updated Tue, 03 Mar 2026 04:34 PM IST

साल का पहला चंद्रग्रहण मंगलवार को लगा। यह चंद्रग्रहण भारत में दर्शनीय है, इसलिए सूतक काल भी मान्य होगा। सूतक काल लगने पर भगवान के दर्शन नही किए जा सकते और न ही पूजा पाठ के कार्य किए जाते हैं। शहर के मंदिरों में चंद्र ग्रहण के कारण प्रातः काल के बाद धार्मिक कार्य नही किए जा सके। मान्यतानुसार ग्रहण के दौरान श्रद्धालुओं ने अपने घरों में तथा पुजारियों ने मंदिरों में मंत्र जाप किया। ग्रहण के दौरान प्रातः काल 6:20 बजे से मंदिरों के मुख्य द्वार बंद रहे। सिद्ध बाबा कांशी गिरि महाराज मंदिर के पंडित पवन कौशिक ने बताया कि हिन्दू धर्म में ग्रहण को लेकर कुछ परंपराएं प्राचीन समय से चली आ रही हैं। ग्रहण के दौरान पूजा-पाठ भोजन और सोने पर भी इसका असर पड़ता है। इन्ही परंपराओं में से एक परंपरा मन्दिर के द्वार बंद किए जाना है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस अवधि के दौरान मानसिक तौर पर पूजा पाठ और मंत्रों का जाप करना विशेष रूप से फलदायी होता है। चंद्र ग्रहण का सूतक नौ घंटे पहले ही लग गया है। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल साधना, जप और आत्मचिंतन का समय हैं। देवेश शर्मा ने बताया कि ब्रह्मपूजा को विराम देकर आंतरिक एकाग्रता पर बल दिया जाता हैं। यही कारण है कि ग्रहण के दौरान मंदिरों के द्वार बंद किए जाते हैं और शुद्धिकरण के पश्चात ही नियमित पूजा-अर्चना शुरू होती है। जिसके कारण सूतक में मंदिरों के मुख्य द्वार बंद रहे और मंदिरों के द्वार ग्रहण समाप्त होने के बाद साफ-सफ़ाई और शुद्धिकरण के बाद खोले जाएंगे

Latest

विज्ञापन

Recommended

विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें