इन दिनों गुजरात एवं हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनावों की राजनीतिक संभावनाओं पर चर्चा जारी है। हिमाचल के मतदान तो संपन्न भी हो गए हैं और वहां मतगणना का इंतजार किया जा रहा है, जो आठ दिसंबर को गुजरात की मतगणना के साथ ही होगा। लेकिन गुजरात में अभी मतदान होना है और वहां विभिन्न राजनीतिक दल धुआंधार प्रचार में लगे हुए हैं। भाजपा समर्थक स्थानीय मुद्दों पर बात न करके मोदी के नेतृत्व के नाम पर वोट देने की बात कह रहे है, वे राज्य सरकार के कामकाज पर बात नहीं कर रहे। महिलाओं को लुभाने के लिए भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने बढ़-चढ़कर वादे किए। गुजरात में चुनाव जीतना भारतीय जनता पार्टी के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है, क्योंकि यह प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह, दोनों का गृह राज्य है। शायद इसी वजह से सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने गुजरात के चुनावी रण में अमित शाह समेत कई दिग्गजों को उतार दिया है। बीजेपी ने गुजरात चुनाव में 150 से अधिक सीटें जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है तो वहीं 27 साल से चला आ रहा सत्ता का वनवास खत्म करने की कोशिश में जुटी कांग्रेस भी पूरा दमखम लगा रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि, गुजरात में बीजेपी की रणनीति यही है कि चुनाव को त्रिकोणीय बनाया जाए और गुजरात का चुनाव त्रिकोणीय होता दिख भी रहा है। गुजरात में बीजेपी और कांग्रेस के मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में पंजाब और दिल्ली की सत्ता पर काबिज अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने भी पूरी ताकत झोंक दी है।