बस इतना समझ लीजिए कि मौत सामने थी और हम लोगों को छठ मइया ने बचा लिया। ट्रेन की बोगी जिस तरह से जल रही थी, अगर कुछ मिनट पहले बाहर नहीं निकले होते तो हड्डी की राख ही मिलती। ट्रेन अब कानपुर आ गई है, लेकिन अभी भी डर लग रहा है। बस किसी तरह घर पहुंच जाएं तो जाकर चैन मिलेगा।