कोमा में जा चुके या मौत की कगार पर पहुंच चुके लोगों को कुछ दिशा-निर्देशों के तहत जिंदगी की वसीयत के आधार पर निष्क्रिय इच्छामृत्यु का हक होगा। सुप्रीम कोर्ट की कॉन्स्टीट्यूशन बेंच ने ये अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि इंसान को सम्मान से जीने का हक है तो सम्मान से मरने का भी हक है।