क्या सच में सिर्फ मदद के बहाने बिछाया जा रहा था एक खतरनाक जाल? बीमारी, बेरोजगारी और मजबूरी को बनाया गया हथियार… गली-मोहल्लों से शुरू होकर सोशल मीडिया तक फैला पूरा नेटवर्क… और अब पुलिस की पूछताछ में खुल रहे हैं एक-एक कर चौंकाने वाले राज। कौन हैं इस गिरोह के मास्टरमाइंड? कैसे फंसाए जाते थे लोग? और क्या देशभर में फैला है इसका कनेक्शन? धर्मांतरण मामले का ऐसा खुलासा…
दरअसल, धर्मांतरण गिरोह लोगों को बीमारी और बेरोजगारी दूर करने का झांसा देकर जाल में फंसाता था। गली-मोहल्लों में जाकर पहले मदद करते थे। इसके बाद धर्म के प्रति भड़काते थे। किताबें भी वितरित की जाती थीं। जो लोग बातों में आते थे, उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से प्रेरित करते थे। कई बार रकम भी दी जाती थी। यह जानकारी धर्मांतरण के मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों से पुलिस के सामने आई है।
सदर निवासी दो सगी बहनों के धर्मांतरण के मामले में पुलिस ने दिल्ली के परवेज अख्तर, जाशिम उर्फ जतिन कपूर, तलमीज उर रहमान और राजस्थान के डीग के रहने वाले मौलाना हसन को गिरफ्तार किया था। न्यायालय ने चारों को तीन दिन की रिमांड दिया था। पुलिस सूत्रों ने बताया कि आरोपियों ने कई महत्वपूर्ण जानकारी दी हैं। यह बताया कि गिरोह कैसे काम करता है और कैसे लोगों को जाल में फंसाता था। आरोपी सजा काट रहे कलीम सिद्दीकी के लिए काम करते थे। उसके जेल जाने के बाद कई लोगों ने गिरोह की कमान संभाल ली थी। पूछताछ में सामने आया है कि यह लोग अलग-अलग जिलों के गली और मोहल्लों में जाते थे। पहले लोगों को पानी की बोतल, खाने का सामान वितरित किया जाता था।