घरों में परिवार के लिए Unpaid Domestic Service के मामले में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं 4 गुना ज्यादा समय देती हैं। नौकरीपेशा लोगों में महिलाओं की भागीदारी तो 25 फीसद तक पहुंच पाई। संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व की बात करें तो हालात और भी खराब हैं। देश की आधी आबादी को कैसे मिलेगा पूरा हक? Chief Impact Officer at Sambhav Foundation के Gayathri Vasudevan से जानिए।