जहानाबाद इन दिनों एक जीवंत चुनावी रंगमंच बन गया है, जहां खेतों में झूमते धान की बालियां अब लोकतंत्र की फसल सी लगती हैं। गलियों में कदम रखते ही बहसों की गर्माहट और नारों की गूंज कानों में पड़ती है। हर चौपाल, हर नुक्कड़, और हर चाय की दुकान पर बस एक ही चर्चा, “इस बार बिहार की सत्ता की चाबी किसके हाथ में जाएगी?” जब ‘अमर उजाला’ का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ यहां पहुंचा, तो लगा मानो लोकतंत्र की धड़कन जहानाबाद की मिट्टी में ही बस गई हो, कहीं उम्मीदें उग रही हैं, कहीं नारों की लहर और बीच में जनता की वो आवाज़ जो आने वाले बिहार का भविष्य तय करेगी। शक्लदीप यादव ने कहा, "जहानाबाद में इस बार लालटेन (राजद) की हवा चल रही है। लोग बदलाव चाहते हैं। पीएम मोदी की नीतियों से आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है। नोटबंदी के बाद से ही लोगों की दिक्कतें बढ़ गई हैं।" अमित कुमार ने कहा, "अब सरकार को बदलने की जरूरत है। तेजस्वी यादव ने युवाओं को नौकरी देने की बात कही है, इसलिए युवा उनके साथ हैं। वो खुद युवा हैं और जानते हैं कि बेरोजगारी की समस्या क्या है।" बिरजू कुमार ने कहा, "जहानाबाद में गरीबों की मदद होनी चाहिए। यहां सड़कों और नालियों की हालत बहुत खराब है। हर नेता चुनाव के समय वादा करता है, लेकिन जीतने के बाद कोई काम नहीं करता।" गुलशन कुमार सिंह ने कहा, "जहानाबाद में इस बार महागठबंधन की जीत तय है। युवा बेरोजगारी से परेशान हैं और बदलाव चाहते हैं।" लव कुमार ने कहा, "यहां पर सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार है। युवाओं को नौकरी चाहिए, ताकि उन्हें बाहर न जाना पड़े। अगर यहां नौकरी मिल जाएगी तो पलायन रुक जाएगा। मौजूदा सरकार के काम को लोग देख चुके हैं, अब युवा तेजस्वी यादव को मौका देना चाहते हैं। हमें नीतीश कुमार से कोई नाराज़गी नहीं है, लेकिन अब बदलाव जरूरी है।"