48 लाख से भूकंपरोधी तकनीक से की गई थी जर्जर भवन की मरम्मत
कई कमियों के बाद भी तहसील प्रशासन की ओर से कार्यदायी संस्था को दिया गया कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र
उत्तरकाशी। जनपद के डुंडा तहसील के जर्जर भवन मरम्मतीकरण का कार्य पायलेट प्रोजेक्ट के तहत भूकंपरोधी तकनीक से करीब 48 लाख से अधिक की लागत से किया गया लेकिन स्थिति यह है कि भवन की छत टपक रही है। ऐसे में रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों को तिरपाल से ढककर भीगने से बचाया जा रहा है। यही नहीं कई कमियों के बाद भी तहसील प्रशासन की ओर से कार्यदायी संस्था को कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया है।
डुंडा तहसील मुख्यालय के जर्जर भवन के मरम्मतीकरण के कार्य में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। ग्रामीण निर्माण विभाग की ओर से करीब 48 लाख से अधिक की धनराशि से भूकंपरोधी तकनीक से भवन के सुधारीकरण का कार्य किया गया लेकिन भवन की छत टपक रही है। स्थिति यह है कि मानसून में टपकती छतों से बचाने के लिए रिकॉर्ड रूम को तिरपाल से ढका गया है।
छत में लकड़ी की कड़ियां सड़ी हुई है और सारे तहसील भवन में पानी टपक रहा है। ग्रामीणों के खाता-खतौनी और खसरे आदि दस्तावेज और नकल खराब हो सकते हैं। कई कमियों के बाद भी तहसील प्रशासन की ओर से कार्यदायी संस्था को कार्यपूर्ति प्रमाणपत्र भी जारी कर दिया गया है। इससे तहसील के उच्च अधिकारियों और ग्रामीण निर्माण विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ रही है।
वरिष्ठ कांंग्रेसी नेता बिजेंद्र नौटियाल का कहना है कि जीरो टालरेंस सरकार में यह एक बड़ा सवाल उठ रहा है। वहीं यह भाजपा सरकार में अफसरशाही की किस प्रकार से हावी है और लगातार भ्रष्टाचार बढ़ रहा है। तहसील भवन में हुआ निर्माण इसका जीता जागता उदाहरण है। डीएम प्रशांत आर्य ने कहा कि मामले की शिकायत मिलने पर सभी दस्तावेज मंगवाए गए हैं। जल्द ही एक कमेटी गठित कर इसकी जांच की जाएगी।