मामूली इलाज के लिए भी डेढ़ सौ किमी दूर दून जाने के लिए हैं मजबूर
नौगांव (उत्तरकाशी)। यमुनाघाटी के सबसे पुराने अस्पताल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव बना है। स्थापना के छह दशक बाद भी अस्पताल उभर नहीं पाया है। सुविधाओं के अभाव में मामूली इलाज के लिए भी लोगों को डेढ़ सौ किमी दूर देहरादून और विकास नगर की दौड़ लगानी पड़ रही है।
वर्ष 1958 में स्थापित प्राथमिक केंद्र नौगांव का 1987 में सीएचसी में उच्चीकरण हुआ था। सीएचसी बने चार दशक हो गए लेकिन अस्पताल उप जिला चिकित्सालय नहीं बन पाया। जबकि यमुनाघाटी का केंद्र बिंदु होने के नाते अस्पताल पर 100 से अधिक ग्राम पंचायतों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी है। प्रदेश में दस वर्षों से भाजपा की सरकार है। इन दस वर्षों में भी अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती नहीं हो पाई।
अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक्स, इएनटी, बालरोग विशेषज्ञ महत्वपूर्ण चिकित्सकों के पद खाली हैं। अगस्त में मुख्यमंत्री ने अस्पताल के विस्तारीकरण के लिए 43 करोड़ की घोषणा की थी लेकिन यह घोषणा भी कहीं खो गई है। वहीं नौगांव सीएचसी के प्रभारी चिकित्सक डॉ. रोहित भंडारी ने कहा कि चारधाम यात्रा के प्रथम पड़ाव पर स्थित है।