फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Udham Singh Nagar News: बासमती धान के लिए उत्तम कृषि पद्धतियां बताईं

Wed, 24 Sep 2025 01:41 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
विज्ञापन
विज्ञापन
काशीपुर। कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को बासमती धान के उत्पादन हेतु कीटनाशकों के सुरक्षित और विवेकपूर्ण उपयोग करने की उत्तम कृषि पद्धतियां बताई गईं। साथ ही मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और बीमारियों की रोकथाम के लिए जानकारी दी गई।
विज्ञापन

मंगलवार को कार्यशाला में करीब 250 किसान एकत्रित हुए। वैज्ञानिक डॉ. एसके शर्मा ने चावल निर्यात में एपि़ा की भूमिका पर जानकारी प्रदान की और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के उपाय बताए। डॉ. निर्मला भट्ट ने कीटनाशक की बोतलों पर लाल, पीला, नीला और हरे रंग के निशान के अंतर के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि लाल रंग का मतलब कीटनाशक काफी जहरीला है और अन्य रंग के उससे कम जहरीले हैं। डॉ. अजय प्रभाकर ने बासमती धान में उर्वरक प्रबंधन पर जानकारी दी। निदेशक प्रसार शिक्षा डॉ. जितेंद्र क्वात्रा ने जिले में धान उत्पादन बढ़ाने के लिए तकनीकें बताईं। बलकार सिंह ने एफपीओ के माध्यम से धान उत्पादन व्यवसायिक स्तर पर अपनाने की सलाह दी। संचालन डॉ. प्रतिभा ने किया। वहां पर डॉ. शोएब अख्तर, डॉ. संधू. वैज्ञानिक डॉ. अनिल सैनी, डॉ. अनिल चंद्रा, जीसी जोशी, सबा मसऊद, मनीष कुमार बाजपेयी, रमेश कुमार पाल आदि मौजूद रहे।
डीसीआर का तरीका बताया
क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. कुलदीप सिंह ने डायरेक्ट सीडेड राइस (डीसीआर) के बारे में बताया। यह धान की खेती का एक आधुनिक तरीका है, जिसमें पारंपरिक रोपाई विधि की तरह पहले नर्सरी तैयार करने और फिर पौधों को मुख्य खेत में लगाने की आवश्यकता नहीं होती है। इसके लिए खेत की अच्छी तरह जुताई करके उसे समतल किया जाता है। इसके बाद सीड ड्रिल मशीन की मदद से सूखी मिट्टी में बीज बोए जाते हैं। बुवाई के बाद हल्की सिंचाई की जाती है। फिर अंकुरित बीजों को ड्रम सीडर या छिटकवां विधि से बोया जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें